युद्ध तकनीक के विकास नया-नया आयाम लऽ रहल अछि। विज्ञानक विकासः विशेष कऽ चिकित्साक क्षेत्र में जतऽ एक दिस मानव-जीवन केँ रक्षाक हेतु तरह-तरह केर औषधि तकनीक विकसित भऽ रहल अछि, दोसर दिस मानव के समूल नष्ट करबा हेतु सेहो, तरह-तरह के अस्त्र/शस्त्र/तकनीको विकसित भऽ रहल अछि। युद्ध तकनीक के क्षेत्रमें नाभिकीय हथियार पृथ्वी पर पूरा मानव सभ्यताके समूल नष्ट करबाक के क्षमता राखैत अछि । ओहि दिशा में एकटा नया आयाम/ हथियार विकसित भऽ चुकल अछि- जैवरासायनिक हथियार । बहुत विकसित आ विकासशील देश के पास ई हथियार अछि जाहिमे प्रमुख अछि-अमेरिका, लिबिया, सिरिया, रूस, इराक, इराक, चीन, कोरिया इत्यादि। जैवरासायनिक हथियार के एक सीमित क्षेत्रमें प्रयोग कैल जा सकैत अछि एवं अन्य हथियार या बम जकाँ एकरा बड़ा स्तर पर प्रयोग नहिं करल जा सकैत अछि।

जैव रासायनिक हथियार -जेना कि नाम सँ स्पष्ट अछि, के प्रयोग कऽ एहि तरह के बिमारी एक सीमित क्षेत्रमें पसारि देल जायत अछि, जाहि सँ ओ क्षेत्रकेर लोग आक्रांत भऽ कऽ बिमारी सँ ठीक नहिं भऽ सकैत अछि, एवं अंत के मरि जायत । जैव रासायनिक हथियार के दू भाग मे वर्गीकृत कऽ सकै छी-

(१) रासायनिक हथियार (२) जैविक हथियार

रासायनिक हथियार सीधा संपर्क सेँ या तऽ मृत्यु हैत । अथवा घायल हैत जैविक हथियार के प्रसार व्यक्तिसँ व्यक्ति अथवा भोजन सामग्री के माध्यम सँ हो‌ईत अछि एवं धीरे-धीरे रोग बढ़ला पर अंत कें मृत्यु हो‌इत अछि । दूनू केँ विस्तार सेँ चर्चा निम्नलिखित रूपसँ देल जा‌इत अछि ।

रासायनिक हथियार

एकरा तीन वर्ग में वर्गीकृत कऽ सकै छी।

१. स्नायुकारक : एहि हथियार के उदाहरण अछि-सारिन, फ़बुन, व़्अ गैस एकरासँ मांसपेशी सिकुड़ जायत अछि, जाहि सँ श्वास-प्रक्रिया बाधित हो‌ईत अछि एवं लकवा मारि देत अछि । एकर प्रसार सीधा संपर्क, भोजन/द्रव पदार्थ के संपर्क सँ हो‌ईत अछि। एकर उपचार सामान्य प्रक्रिया अछि-अर्थात्‌ रसायन के शरीर सँ बाहर करना‌ई एवं एकर विषरोधी दवाक सेवन ।

२. श्वासरोधी कारक : जेनाकि-क्लोरीन गैस, फासजीन गैस, एकर लक्षण बहुत देर तक पता नहि चलैत अछि, शुरू में खाँसी हो‌ईत अछि एवं बाद में श्वासरोधन एवं फेफड़ा कें सूजन हो‌इत अछि । उपचार सामान्य अछि- अर्थात्‌ - रसायन के शरीर सँ बाहर केना‌ई एवं विषरोधी दवाक सेवन।

३. व्रण गैस : जेनाकि लेवसा‌ईट गैस, मस्टर्ड गैस एकर लक्षणमे -चमड़ा पर चकता एवं जलन । एकर प्रसार सीधा संपर्क सँ हो‌ईत अछि । एकर उपचारमे शरीर सँ रसायन के बाहर कयलाक बाद एंटीबायोटिक्स के सेवन अछि । ज्यादा खराब केस मे प्लास्टिक सर्जरी सँ घाव ठीक भऽ सकैत अछि ।

जैविक हथियार

एहिमे प्रमुख अछि, एंथ्रैक्स, चेचक, बोटूलिस्म, प्लेग, एहि जैविक हथियार के आसानी सँ कतहुँ प्रयोग करल जा सकैत अछि। एकर मृत्युदर बहुत ज्यादा अछि। आब एक-एक कऽ प्रत्येक जैविक हथियार के वर्णन करब।

एंथ्रैक्स :

एंथ्रैक्स के सेहो तीन प्रकार अछि- क्यूटिनस, इन्हेलेशन, और इन्टेस्टा‌इनल प्रथम एंथ्रैक्स मे फोड़ा निकलैत अछि जेनाकि कोनो कीड़ाके काटलासँ हो‌ई, बिना दर्द वला अल्सर/घाव भऽ जायत जेकर केंद्रमे दाग रहत। संक्रमित व्यक्ति सँ संपर्क भेला पर ई रोग पसरैत अछि । एकर इलाज एन्टीबायोटिक्स दवा अछि । तहिना दोसर एंथ्रैक्स के लक्षण फ्लू जकाँ अछि, सांसमे तकलीफ, सामान्य तौर पर संक्रमण के ७ दिन बाद हो‌ईत अछि । बहुत घातक, पूर्ण जानलेवा संक्रमित क्षेत्र में सांस लेला पर हो‌ईत अछि । इलाज- उचित एन्टीबायोटिक्स दवा केर सेवन । इन्टेस्टा‌इनल एंथ्रैक्स के लक्षण -उल्टी, भूख मे कमी, पेट-दर्द, खून केर उल्टी, डायरिया। एकर प्रसार आर चिकित्सा सेहो अन्य दुनू तरह के एंथ्रैक्स जकाँ अछि ।

चेचक

एकरासँ तऽ सब कोय परिचित छी । एकरा आसानी सँ एक क्षेत्र मे संक्रमित क‌एल जा सकैत अछि । एकर लक्षण- पूरा शरीर में फोड़ा, एकर प्रसार-मुँहस्राव एवं कफ के माध्यम सँ हो‌इत अछि । एकर कोनो सीधा उपचार नहिं अछि, परन्तु जों शुरू के ४ दिन कें अंदर वैक्सीन दऽ देल जाय, तऽ क्षति कम भऽ सकैत अछि।

प्लेग :

एकर लक्षण -फ्लू जकाँ, बुखार, शरीर पर फोड़ा; एकर प्रसार-मुख स्राव एवं कफ सँ हो‌ईत अछि। एकर इलाज एंटीबायोटिक्स दवा ।

बोटूलिस्म :

एकर लक्षण- झलफला‌इत दृष्टि, सूखा‌एल मुंह, रद्द करबाक प्रवृत्ति, मांसपेशीक कमजोरी, अंत मे लकवा।
एकर प्रसार चमड़ा के ऊपर घाव सँ आर प्रदूषित भोजन सँ हो‌इत अछि। एकर इलाज एंटीटॉक्सिन दवा।

ट्युलारेमिया :

लक्षण-अचानक बुखार, कंपकपीं, सरदर्द, मांसपेशी में दर्द, जोड़ दर्द, सूखा खांसी, कमजोरी संक्रमित कीड़ा के काटला सँ मुख्यतः। ई कीड़ा संक्रमित जानवर के कंकाल पर रहैत अछि। प्रदूषित भोजन एवं पानी अथवा संक्रमित क्षेत्रमें सांस लेलामें।

इलाज उचित एंटीबायोटिक्स अछि।
वा‌इरल हैमोर्रेनेजिक फीवर

उदाहरण-इबोला लक्षण-सरदर्द, मांसपेशी दर्द, खून स्राव, प्रसार- सीधा संपर्क अथवा रक्त संपर्क, या अन्य स्राव संपर्क,

इलाज :

कोनो न‌ई, वैक्सीन देल जा सकैत अछि

खतरा
जहाँ तक खतरा के बात अछि, चेचक बहुत तेजी सँ पसरैत अछि। एवं एहि सँ वृहत जनसंख्या केँ मारल जा सकैत अछि। ई रोगक स्रोत केँ आतंकवादी द्वारा प्रयोगशाला सँ चुरायल जा सकैत अछि एवं कतहुँ प्रयोग कयल जा सकैत अछि। हालांकि जे एकर सँ आक्रमण करत, ओकरो ई रोग अवश्ये हैते, परंतु आ‌इ के युग में आत्मघाती फिदायी हमलावर तऽ आम बात अछि । एंथ्रैक्स जानवर सबके आम बीमारी अछि एवं एकरो स्रोत केँ कोनो प्रयोगशाला सँ चुराकऽ कोनो क्षेत्र में आक्रमण कयल जा सकैत अछि। परंतु एकर प्रसार पैघ स्तर भेना‌ई मुश्किल अछि, तेँ एकर प्रयोग छोट स्तर भऽ सकैत अछि।

इलाज :

ई सब तरह के बहुत रोग एंटीबायोटिक्स एवं वैक्सीन उपलब्ध अछि, परंतु किछु एंटीबायोटिक्स के कुप्रभाव बहुत अछि एवं ज्यादा प्रयोग करला पर एकर प्रतिरोध उत्पन्न भऽ सकैत अछि । पैघ संख्यामे वैक्सीन के प्रयोग सेहो मुश्किल अछि । रासायनिक हथियार के प्राप्त केना‌ई आसान अछि, परंतु बेसी संख्या मे उत्पादन कयना‌ई मुश्किल अछि।

कहल जायत अछि जे इराक-इरान युद्ध एवं इराक कुर्द युद्ध मे इराक मस्टर्ड गैस के प्रयोग कयलक। दोसर उदाहरण, १९९५ में टोकियो के एक अन्डरग्रा‌उण्ड रास्तामे, एक संप्रदाय-ओम श्रीनिकयो के लोग सारिन गैस के प्रयोग कऽ १२ आदमी के मारि देलक।

चूंकि ई सब रोग के स्रोत के पैकेट सेँ पोस्ट द्वारा पार्सल सेँ पठा‌एल जा सकैत अछि, अमेरिका में पोस्टल सामग्री के पहिने अत्यधिक ऊर्जा वाला एलेक्ट्रान बीम सँ स्टरला‌इज कयल जायत अछि। एलेक्ट्रान बीम पैकेट में उपस्थित कोनो सूक्ष्मजीव के मारि देत अछि, हालांकि एहि सँ पैकेट के सामान विशेष कऽ विद्युत उपकरण कें क्षति पहुँचैत अछि। परंतु अन्य कोनो देश के पास ई सुविधा नहिं अछि।

गैस मास्क के प्रयोग सेँ भी किछु बचाव भऽ सकैत अछि परंतु तखन एकर आक्रमण के सूचना पहिने सँ हो‌ई तखनमे सबसँ बढ़िया उपाय, सतर्क रहना‌ई अछि, आ कोनो संदिग्ध पैकेट के अलग राखि एवं विशेषज्ञ के सूचित करी

सौजन्य: बीबीसी-सा‌इंस इन्फार्मेशन