नेबोक गुण आ ओहि सँ फायदा -आचार्य बालकृष्ण नेबो (नींबू) सँ सभ कियो परिचित छथि । एकर अचार आ चटनी लोक बड़ चाव सँ खाईत छथि । ई विटामिन ‘सी’ क मुख्य स्त्रोत अछि । एकर अनेको जाति यथा कागजी, विजौरी, जम्मीरी, मीठा आदि होईत अछि । तथपि दवाईक रुप मे प्राय : कागजी नेबोक प्रयोग करक चाही । कागजी नेबो खट्टा वातनाशक, पाचक आ हल्लुक होईत अछि । ई कीड़ा समूहक नाशक, पेट दर्द नाशक, खुब खट्टा, धरक बाधानाशक, रुचि कारक, वात-पित-कपफ मे अत्यधिक लाभदायक होईत अछि । नेबोक व्यवहार अनेकानेक रोग आ आन काज मे होईत अछि, जकर संक्षिप्त विवरण एना अछि :-
उन्माद : नेबोक रस के माथ पर लेपला सँ पागलपन एहन रोग मे लाभ होईत अछि । आवेश रोग : स्त्रीक आवेश रोग मे बढल हृदयक धडकन के सामान्य करबाक लेल नेबोक रस पियेबाक चाही । माथ दुखेनाई : नेबोक दू फाँक के कनपट्टी पर एक घण्टा तक सेकला सँ माथ दुखेनाई कम होईत अछि । केश : नेबोक रस मे धात्री (आँवला) के पीस के केश मे लगेला सँ रुसी मेटाइत अछि आ केश झरनाई रुकि जाइत अछि । आँखिक रोग : नेबोक रस कें लोहाक खरल मे लोहा सँ घोंटैत-घोंटैत जहन ओ कारी भऽ जाए तँ आँखिक मे एकर अंजन लगेला सँ आँखिक दर्द कम होईत अछि । काटल नेबोक आधा भाग कें लोहाक जंग पर रगड़ि कें पीरा कपड़ा मे पोटरी बना कें आँखि पर स्पर्श कऽ कऽ घुमेला सँ खुजली आ लाली एअहन आँखिक बिकार समाप्त भऽ जाइत अछि । कील मुहांसा : नेबोक रस कें चेहरा पर रगड़ला सँ कील-मुहासा ठीक भऽ जाईत अछि । नेबो, तुलसी आ कारी कंसौदी तेलक रस बराबर मिला कऽ रौद मे राखू । गाढ़ भेला पर एकरा मूँह पर मलू । इ मुहांसादूर कऽ दैत अछि । नेबोक रस मे मधु (शहद) मिला कें लगेला सँ चेहराक झुर्री मिटा जाइत अछि । छाला : जीह आ मसूढ़ पर छाला मे नेबोक छिल्का रगड़ला आ नींबूक २०-३० ग्राम रस नियमित पीबा सँ जल्दी लाभ होईत अछि । उल्टी : खेनायक बाद होमयवला उल्टी के रोकबाक लेल टटका नेबोक ५-१० मिलीलीटर रस पीबाक चाही । मंदाग्नि : एकटा नेबोक रस मे थोड़ेक अदरक आ थोड़े काला नमक मिला कें सेवन कयला सँ अर्जीर्णता, मंदाग्नि, वायुकफ आ आम वातक नाश होईत अछि । अजीर्ण आ उदरशुल : नेबोक रस तीन ग्राम, चूनक पानि १० ग्राम, मधु १० ग्राम कें मिला कें २०-२० बूंदक मात्रा मे लेला सँ दुनू रोग शांत भऽ जाईत अछि । अरुचि : नेबोक शर्बत में दुगुणा पानि, १-२ लौंग और काली मिर्च मिला कऽ पीयला सँ अरुचि मिटाइत अछि । नेबो कें काटि कें काला नमक बुरकि कें चाटला सँ सेहो अरुचि मिटाइत अछि । एकर रस गर्मीक मंदाग्नि कें मिटबैत अछि। कृमि रोग : नेबोक रसक सेवन कयला सँ आंत के भीतर टायफायड, अतिसार, हैजा आदिक जे कीटाणु पैदा भ जाइत अछि । नेबोक रस सँ मरि जाइत अछि । यकृत : गुनगुन जल मे नेबोक रस आ मिसरी मिला कऽ भिनसर चाय जेंकाँ पीयला सँ यकृतक क्रिया सुधरैत अछि । यकृत आ प्लीहा रोग मे भुजल अजवायन आ सैंधा नमक मिला कऽ नेबोक रस पीयला सँ बहुत लाभ होईत अछि । मोटापा : भिनसर-भिनसर खाली पेट २०० ग्राम गुनगुन पानि मे २ चम्मच नेबोक रस आ १ चम्मच मधु दऽ कऽ पीयला सँ मोटापा घटैत अछि । हैजा : हैजा मे रोज दूटा नेबोक रसक सेवन भोजन सं पहीने कयला सँ या रस मे मिश्री मिला कँ सेवन सँ हैजा प्रभावहीन भऽ जाईत अछि । पित : एकटा नेबोक रस मे ५ ग्राम मिश्री मिला कें सेवन कयला सँ पित्तक शमन होईत अछि । अतिसार : ३० ग्राम कागजी नींबूक रस २-३ बेर देला सँ अतिसार मे लाभ होईत अछि। तिल्ली : नेबोक अचार सँ बढ़ल तिल्ली मे लाभ होइत अछि । नेबो आ प्याजक २० ग्राम रस मिला कें १४ दिन तक भिनसर साँझ पीयला सँ बढ़ल तिल्ली घटैत अछि । पथ मे दालि व चावलक पानि पीबाक चाही । आमवत : आमवात मे नेबोक रस एक-दू ग्राम चारि-चारि घण्टाक बाद सेवन करबाक चाही । कीड़ा डसनाई : मच्छर आदि विषैला कीड़ाक डँसला पर नेबोक रस लगेबाक चाही । बिच्छुक विष : नेबोक बीचाक मींगी नौ ग्राम, सैंधा नमक ८ग्राम दुनूक
फंकी देला सँ बिच्छूक विष उतरैत अछि । विषम ज्वर : नेबोक रस तेज कहवा मे बिना दुध मिलेने पीयला सँ मलेरिया
ज्वर शीध्रे दूर भऽ जाइत अछि । इन्फिलुएंजा : एहि मे नेबोक चाय (गरम पानि मे नेबोक रस मिश्री) बहुत
गुजकारी होईत अछि । (साभार योग संदेश) |