हम
मिथिला केँ महान बनाकऽ रहबै
राजा जनक सन विदेह बनाकऽ सुनबै धरती सँ सीता सन नारी उपजा कऽ रहबै जे मिथिला केर नारी केँ चंडी बनादेतै । हम मिथिला केँ महान बनाकऽ रहबै जे बाधक बनतै तकरा गीता केर पाठ पढ़ादैब ओ शंखध्वनि करतै तँ शगुक पेटक पानि डोलि जेतै आ अपने सीमा केर भीतर अएबाकेँ साहस नहि करतै । हम मिथिला केँ महान बनाकऽ रहबै अयाची सन बालक केँ बनेबै जे परदेशी केँ ज्ञानक पाठ पढ़ौते स्वदेशी केँ संतोषी बनौतै ॥ हम मिथिला केँ महान बनाकऽ रहबै नेना भुटका केँ शंकर मिश्र बना देबै ओ सभ जग केँ कहतै " बालाऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती । अपूर्णे पंचमे वर्ष वर्णयांम जगत्रयम ॥ जे सुनतै से कहतै सरिपहुँ छै मिथिला जग मे महान ॥ |