चंदन अछि एहि देशक माटी, तपोभूमि सभ गाम अछि। सभ बाला देवीक प्रतिमा, बच्चा-बच्चा राम अछि। भारतीय संस्कृतिक संगहि संग देशक नौनिहालकेँ प्रतिभाक उकरेत एहि पंक्तिक प्रमाणिक ओ जीवंत बानगी अछि छह वर्षीय मासूम अभिनव। गया जिलाक बेलागंज प्रखंडक भोरी गामक मूल निवासी एहि प्रतिभा सम्पन्न बालक केर पूरा परिवार आध्यात्मिक संस्कारसँ युक्त अछि। चारे बर्षक उम्रहिसँ अभिनव रामायण ओ गीताक पाठ करैत अछि। आय एहि संपूर्ण सुन्दरकाण्ड ओ गीताक अधिकांश श्लोक कंठस्थ अछि। बनारस केर एकटा निजी विद्यालयक पहिल वर्गक छात्र एखन पटना स्थित राजाबाजारमे अपन नाना सेवानिवृत्त सूबेदार रघुवंश सिंहक संग रहि रहल अछि। रामायण ओ गीताक कठिन श्लोक सभकेँ बेअटक, शुद्ध ओ सस्वर पाठसँ मंत्रमुग्ध करि देवयवला एहि बाल प्रतिभाक दूटा बहिन बारह बर्षीय रश्मि ओ आठ वर्षीय स्वाति केर प्रतिभाक सेहो कोनो सानी नहि अछि। अभिनवकेर एहि दूनू बहिनकेँ सेहो रामायण ओ गीताक अधिकांश पंक्ति सभ कंठस्थ अछि। अभिनवकेर प्रतिदिन भोर-भोर नहा धोकऽ सुंदरकाण्ड आ गीताक पाठ केनाइ दिनचर्या अछि। इ जानिकऽ सभ कियो दाँत तले आँगुर दबाबैत अछि जे एतेक व्यापक ज्ञानार्जनक पाछाँ कोनो विशेषज्ञ वा कोनो गुरू केर हाथ ओहि पर नहि रहैत अछि। ओ एखन धरि किघु सीखलक अछि ओ ओकर असाधारण प्रतिभाक देन अछि। अभिनव अपन दादा घनश्याम शर्माक द्वारा कयल जायवला सुन्दरकाण्ड एवं गीताक पाठकेँ ध्यानसँ सुनैत रहैत अछि। कोनो बातकेँ सुनिकऽ शत-प्रतिशत ग्रहण कऽ लेबाक क्षमता केँ लोक दैविक कृपा मानैत छथि। एखन तऽ ओ जिनगीक मात्र छह वसंते देखलक अछि मुदा एहि छोट उम्रमे ओकर व्यक्तित्व मे जाहि ओज आ प्रखरताक समावेश देखबाक भेटैत अछि, उमेद कयल जाऽ रहल अछि जे आगाँ आवयवला दिनमे इ बालक प्रतिभाक क्षितिज पर एकटा एहन चमकैत सितारा होयत जे भावी पीढ़ी केँ आलोकित ओ प्रेरित करबामे सहायक होयत। मैथिली भाषा साहित्यक विशिष्ट विद्वान ओ प्रख्यात राजनेता डॉ० विद्यानाथ झा ‘विदित’क वर्ष २००८ सँ २०१२ धरिक ५ वर्षक अवधिक हेतु साहित्य अकादेमी मे मैथिली परामर्शदात्रृ समितिक संयोजक हेतु नामित होयबाक सूचना अछि। संथाल परगना कॉलेज, दुमकामे मैथिली विभागाध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय प्राचार्यक पदसँ अवकाश प्राप्त डॉ विदित आधुनिक मैथिलीक बहुआयामी रचनाकारक रूपमे प्रसिद्ध रहल छथि। हिनक शोध आधारित प्रबन्ध ‘मैथिली ओ संथाली : सम्पर्क ओ सामीप्य’ भाषाक तुलनात्मक अध्ययनक दृष्टिमे मानक मार्गदर्शक रहल अछि जे मैथिली अकादमी, पटनासँ प्रकाशित भऽ शोधार्थी ओ भाषावैज्ञानिक लोकनिक आकर्षण केन्द्र रहल अछि। सामान्यो बोली-वाणी मे काव्यात्मक प्रयोगक धनी डॉ० विदितक तीन गोट काव्यसंग्रह क्रमशः सिंगरहार, सुरासुन्दरी आ सुरामृतम् प्रकाशित अछि। ‘ओ’ तथा ‘खट्टरकाकाक चिट्ठी’ हिनक प्रसिद्ध उपन्यास आ ‘जोड़ल आखर : पसरल भाव’ विशिष्ट स्तम्भलेखनक रूपमे प्रख्यात भेल। ‘फूटल चूड़ी’ हिनक कथासंग्रह छनि तथा अनेकानेक निबन्ध ओ कथा पत्र-पत्रिकामे छिड़िआयल छनि। हिनका द्वारा रचित उपन्यास ‘मानवकाल्य’ शीघ्र लोकर्पित होयबाक सूचना अछि। प्रसिद्ध निबन्ध संग्रह ‘संकलन’ मे ई सह सम्पादन कार्य कयने छथि। साहित्य अकादेमी मे मैथिलीक हेतु डॉ० विदितक नामित भेलासँ सम्पूर्ण मैथिली-प्रज्ञा आत्मतुष्टिक अनुभव कऽ रहल अछि आ हिनक कार्यकालकेँ साहित्य अकादेमीमे मैथिलीक स्वर्णकालक रूपमे देखबाक आशा संजोगने अछि। बहुत दिनक बाद संयोजकक ई पद प्रवासी मैथिलक हाथमे गेने जतऽ प्रवासी समुदायमे अपार हर्षक संचार भऽ रहलनि अछि। ततहि झारखंडक प्रवासी मैथिल ओ मैथिली कार्यकर्ता लोकनि बेसी उत्साहित छथि। ओ लोकनि झारखंडमे ‘मैथिली अकादमी’क स्थापनाक प्रति खास कऽ आश्वस्त भ’ रहलाह अछि। ‘मिथिला विहार’ परिवार हिनक कर्मण्यताक सुवास सँ मैथिलीकेँ नव क्षितिज धरि प्रक्षेपित होयबाक कामना करैत अछि। बधाई महाकवि विद्यापति केर स्मृति मनओल जायवला त्रिदिवसीय विद्यापति पर्व समारोह उत्सवी माहौलमे सम्पन्न भेल। बिहारक राज्यपाल आर०एस०गवई विद्यापति भवनमे समारोहक विधिवत् उद्घाटन करैत भेल भरोसा दिलौलनि जे मैथिली भाषाक एकर उचित सम्मान भेटत। एहि मादे राज्य सरकारसँ सलाह मशविरा करताह। एकरा उपरान्ते अपन सलाह देताह। ओ कहलनि जे भाषा संस्कृति केर प्रतीक होयत अछि। हम अपन भावना सभक अभिव्यक्ति अपन मातृभाषामे नीक ढंगसँ कऽ पाबैत अछि। हम अपन मातृभाषाक सम्मान तऽ करबे करी संगहि आनक मातृभाषाक सेहो सम्मान करय। हमर देश विभिन्नतामे एकताक देश अछि मुदा प्रादेशिक एकताएसँ देशक एकता मजबूत ओ अक्षुण्ण बनैत रहैत अछि। एकर पूर्व राज्यपाल श्री गवई ओ पूर्व मुख्यमंत्री डॉ० जगन्नाथ मिश्र केँ चेतनासमिति द्वारा मिथिलाक प्रसिद्ध ‘पाग’ पहिराकऽ सम्मानित कयल गेल। कार्यक्रमक शुरूआत मंदाकिनी, स्नेहा, नेहा, शुशबू आ मधु गोसाउन गीत ‘जय-जय भैरवी’ सँ कयलनि। राज्यपाल मैथिली भाषा ओ संस्कृतिमे विशेष योगदान देवयवला विभूति लोकनिकेँ ताम्रपत्र दऽकऽ सम्मानित कयलनि। सम्मानित होवयवलामे संगीतज्ञ चंडेश्वर झा, चित्रकार कृष्ण कुमार कश्यप, कविता देवी (चेतना सम्मान) मोहन भारद्वाज (यात्री चेतना पुरस्कार) डॉ० रामानन्द झा रमण जगत नारायण चौधरी, प्रिया दास, कुमार गगन, श्यामा झा ओ पिंडारूच सांस्कृतिक परिषद प्रमुख अछि। राज्यपाल चेतना समितिक स्मारिकाक संगहि विलट पासवान विहंगम, ताराकान्त मिश्र ओ चेतना समितिक पोथीक सेहो विमोचन कयलनि। राज्यपाल मिथिलाक पाग पहिरने मैथिल भाषी लोकनिसँ सोझाँ होयत बाजलनि जे नितीश सरकार मैथिली भाषाक अपना दिससँ न्याय दिलयबाक काज कयलनि अछि। हलाँकि विद्यालयमे सेहो मातृभाषाक सम्मान भेटबाक चाही। महाकवि विद्यापतिकेँ अपन श्रद्धांजलि अर्पित करैत भेल कहलनि जे जाहि तरहे रविन्द्रनाथ टैगोर बंगाले नहिं देश ओ दुनियाँमे अपन रचना सभक चलते ख्याति पौलनि, ओहि तरहे विद्यापति सेहो प्रसिद्धि पओलनि। मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ० जगन्नाथ मिश्र मैथिलीमे भाषण प्रारंभ कयलनि मुदा बादमे राज्यपालकेँ मिथिलांचलक मादे बतयबाकलेल हिन्दीएमे अपन बात राखलनि। ओ कहलनि जे मिथिलांचलमे सभ किघु अछि मुदा बड्ड प्रयत्नक बाबजूदो अपेक्षित विकास नहिं भऽ सकल अछि। इ इलाका बाढ़सँ त्रस्त रहैत अछि। मैथिली भाषाकेँ वाजपेयी सरकार सम्मान दिलयबाक काज कयलनि मुदा आइ विद्यालयकेर पाठ्यक्रमसँ इ गायब अछि। एहि भाषाकेँ फेरोसँ एकर पुरान सम्मान भेटबाक चाही। इ भाषा देशक परंपराकेँ प्रतिष्ठित कयलक अछि। आर्थिक दृष्टिसँ मिथिलांचल भनहि पिछड़ल हुअय, मुदा सांस्कृतिक मामलामे आइयो क्षेत्र बड्ड आगाँ अछि। विद्यापति जेहन कवि एहि क्षेत्र केँ एकटा उच्च स्थान देलक अछि जकरा कियो डगमगा नहिं सकैत। इ बात स्टेट बैंकक मुख्य महाप्रबंधक (बिहार आ झारखंड) ओ समारोह केर मुख्य अतिथि कृष्ण कुमार कहलनि। अवसर छल चेतना समिति केर तत्वावधानमे विद्यापति पर्व समारोह ०७ केर समापन दिवस केर। ओ कहलनि जे वर्त्तमानमे एहि भाषाक धूम देशक संगहि-संग विदेश मे सेहो भऽ रहल अछि। ओ बैंकक दिससँ मिथिलाँचल क्षेत्रक हर संभव सहायता करबाक बात कहलनि। एहि अवसर पर विशिष्ट अतिथि बिहार सरकारक सहकारिता मंत्री रामजी ऋषिदेव मैथिली भाषाक प्रचार करबाक बात कहलनि। ओ कहलनि जे जाहि तरहे भोजपुरीक विकास भऽ रहल अछि ओहि तरहे मैथिलीक विकास सेहो होयबा चाही। कार्यक्रमक उद्घाटन करैत भेल बिहार सरकारक ऊर्जा मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव कहलनि जे मैथिली भाषाकेँ आगाँ केनाइ केर बड्ड जरूरत अछि। ओ कहलनि जे पाँच भाषावला एहि प्रदेशमे मैथिली एकमात्र साहित्यिक भाषा अछि। संघ लोक सेवा आयोग मे तऽ एकरा मान्यता भेट गेल मुदा आयोगक पाठ्यक्रमक अनुसारे एकेर पोथी सभक कमी अछि। ओ बाजलनि जे सभ मिथिलावासीकेँ मैथिली भाषा पढ़बाक आदत डलबाक चाही। देर रात धरि चलल सांस्कृतिक कार्यक्रम मेँ विद्यापति लिखित मैथिली गीत ओ डॉ० अरविन्द ’अक्कू’ द्वारा लिखित नाटक अलख निरंजन केँ लोक सभ बड्ड पसिन कयलनि। नाटकमे मिथिलांचलक गामकेर विकासमे भऽ रहल रूकावट केँ निर्देशक कौशल कुमार दास बखूबी दिखयबाक प्रयास कयलनि। संपूर्ण दिन चलल एहि समारोह मे बाल मेला ओ आनन्दमेला मुख्य आकर्षणक केन्द्र छल। जतय बाल मेलामे नेना सभक चित्रकला, संगीत, लेख आदि प्रतियोगितामे भाग लेलनि ओतहि आनंद मेलामे मिथिलांचल व्यंजनक धूम रहल। मैथिली महिला संघक तत्वावधानमे एहि मेलाक आयोजन कयल गेल। मिथिलांचलक प्रसिद्ध पकवानमे तिलकोरक तरूआ, माग, मखानाक खीर, सकरौड़ी (दूध आ बूँदीसँ बनल एकटा व्यंजन), बड़ी आदिकेँ लोक सभ बड्ड पसिन कयलनि। एहि मादे जितेन्द्र कुमार कहलनि जे हमरा एहि मेलाक संपूर्ण वर्षधरि इंतजार रहैत अछि। बर्ष धरि आजुके दिन हमरा एहन पकवान खयबक मौका भेटैत अछि। संघक अध्यक्षा प्रेमलता मिश्र ’प्रेम’ कहलनि जे मेला मे सभसँ बेसी लोक पान ओ मखान पसिन कयलनि अछि।ओ कहलनि जे मिथिलांचलमे एहन मान्यता अछि जे इ दुनू चीज स्वर्ग सेहो नहि भेटैत अछि। ओ कहलनि जे मिथिलांचलक व्यंजनकेँ लुप्त होयबासँ बचेनाइ एहि आयोजनक मुख्य उद्देश्य अछि। दोसर दिस भोरहिसँ बाल मेलाक धूम रहल। नेना लोकनि मेलामे बड्ड उत्साह आ जोशक संग भाग लेलनि। प्रतियोगितामे सफल नेना लोकनिकेँ चेतना समिति दिससँ पुरस्कृत कयल गेल। चित्रकला प्रतियोगिता मे प्रथम स्थान उज्ज्वल केँ भेंटल तऽ संगीतमे सुप्रिया झा केँ। लेख प्रतियोगितामे अमित प्रथम रहल तऽ म्यूजिकल चेयरमे शैली झा। अन्य सफल छात्र भारत रत्न, मीनाक्षी, दिव्यासु, भामिनि, स्मिता, निशांत, अमनपुत्र आदि अछि। तीन दिन चलल एहि समारोहक मंच संचालन समिति केर उपाध्यक्ष विवेकानंद झा कयलनि। एहि मौका पर समिति केर अध्यक्ष विजय कुमार मिश्र सचिव डॉ० वासुकीनाथ झाक संग कएकटा लोक उपस्थित छलाह। - (साभार, दैनिक जागरण) दरभंगा । दिनांक २२ नवम्बर २००८, मिथिलाक लोकप्रिय कविकोकिल श्रद्धेय विद्यापति ठाकुरक पुण्य स्मृति-समारोह केर शुभ अवसर पर विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा द्वारा निम्नलिखित १६, (सोलह) विद्वान लोकनिकेँ ‘मिथिला विभूति’ सम्मान सँ सम्मानित कएल गेल । सर्वश्री सुधाकान्त, शशिकान्त, डॉ. महेन्द्र नारायण राम, निशिकान्त ठाकुर, संजय मिश्र, डॉ. एम. पी. वर्मा, कुमारेश सिंह, अर्जुननारायण चौधरी, सम्पादक ‘मिथिल महान’ (म.म. मुरलीधर झा पत्रकरिता सम्मान) डॉ. शशिनाथ झा, डॉ. ए. एन. त्रिपाठी, दयानन्द झा, डॉ. देवनारायण झा, राम किशोर झा, राजवल्लभ सिंह डॉ. विद्यानाथ झा आर मनमोहन झा । ई समारोह दरभंगा शहर केर एम. एल. एस. एम. कॉलेजक सुसज्जित प्राँगण मे आयोजित कयल गेल छल । उद्घाटन-सम्भाषण क उपरान्त मिथिलाक गौरव-गरिमाक आर विकासक अनन्य प्रेमी डॉ. सी. पी. ठाकुर, पूर्व केन्द्रीय मंत्री अपना करकमल सँ सभ सम्मानित सज्जनकेँ गरा मे माला पहिरा कऽ, माथ पर पाग आ देह पर कश्मीरी दोशाला सँ आभूषित करैत प्रमाण पत्र प्रदान कयलनि तथा आशाक संग विश्वासो प्रकट कयलनि जे जीवनक हर क्षेत्र मे मिथिला अवस्से प्रगति करत । बिहार विद्यालय परीक्षा समितिकेर पाठ्यक्रममे आब मैथिलीक मातृभाषा नहि रहल। राज्य सरकारक एहि कृत्य केर खिलाफ भड़कल लोक सभ राज्यपाल आर०एस० गबई सँ भेट कयलनि। राज्यपाल एहि मादे समुचित कार्रवाई केर आश्वासन देलनि। राज्यपालकेँ सौंपल गेल ज्ञापनमे कहल गेल अछि जे मैथिली भाषा संघ लोकसेवा आयोग ओ बिहार लोकसेवा आयोगक परीक्षा सभमे एकटा विषय केर रूपमे प्रतिष्ठित अछि। एनामे मैट्रिक केर पाठ्यक्रमसँ ओकर मातृभाषावला हैसियत छीननाइ ओकर अस्मिताकेँ खत्म करबाक नियोजित साजिश अछि। प्रतिनिधिमंडलमे प्रेमचंद मिश्रा, मोहन भारद्वाज, एच० के० वर्मा, श्रीमती वीणा कर्ण, मुशर्रफ अली ओ दिलीप पासवान शमिल छलाह। राज्यपालसँ शिकायत कयल गेल जे बिहार विद्यालय परीक्षा समितिक पछिला परीक्षामे मैथिली भाषी छात्र लोकनिक संख्या दू लाख रहल जखनकि बांग्ला भाषी परीक्षार्थी लोकनिक संख्या एक हजारसँ सेहो कमे छल मैथिली साहित्यकार मोहन भारद्वाजकेँ प्रबोध साहित्य सम्मान स्वस्ति फायंडेशन, नई दिल्ली केर अध्यक्ष ओ केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थानक, निदेशक प्रो० उदय नारायण सिंह नचिकेता ओ न्यासी प्रो० अभय नारायण सिंह एकटा संवाददाता सम्मेलनमे इ जानकारी देलनि। एकरा पूर्व १५ सदस्यीय निर्णायक मंडली श्री मोहन भारद्वाजकेँ एहि पुरस्कारक लेल चयनित कयलक। एहि मंडलीमे पं० गोविन्द झा, डॉ० नीता झा, महेन्द्र मलंगिया, मैथिली अकादमीक निदेशक रघुवीर मोची, मंजर सुलेमान, किशोर केशव आदि शामिल छलाह। न्यासीक सदस्य लोकनिक मादे एहि बेर कुल २३ टा नाम पर विचार कयल गेल। कुल चारि चरणक बाद जाकऽ श्री भारद्वाजक नाम पर सहमति बनल । अंतिम चरणमे श्री भारद्वाज ओ राजमोहनझाक नाम छल मुदा निर्णायक मंडली भारद्वाजक नाम पर सर्वसम्मति देखौलनि। एहि अवसर पर उपस्थित मैथिली साहित्यमे अपन प्रखर आलोचनाक लेल चर्चित श्री भारद्वाज पुरस्कारक घोषणा पर प्रसन्नता जतौलनि। मधुबनी जिलाक नवानी गामक निवासी ६५ वर्षीय श्री भारद्वाजकेँ हालहिमे चेतना समिति द्वारा यात्री सम्मान देल गेल अछि। वर्ष ९६ मे हिनक पहिल पोथी ’अनवरत’ आयल। एकर बाद अकल पाठ, मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित रामकृष्ण झाक पोथी पर मोनोग्राफ टॉलस्टाय केर पोथीक अनुवाद, मैथिलीक पहिल समालोचक रमानाथ झा केर लेख सभक संकलन सेहो शीघ्र प्रकाशित होयत। हिन्दीमे सेहो कएकटा कविता सभ ओ लिखलनि अछि । हुनका ई पुरस्कार दिनांक २३-२-२००८ कें पटना मे प्रदान कएल गेलनि । हालहि मे दिल्ली सरकार दिल्ली मे मैथिली-भोजपुरी अकादमीक गठन कयलक अछि । एहि संबंधी निर्णय जनवरी २००८ मे मंत्रिमंडलक बैसार मे लेल गेल छल आ ३ मार्च २००८ केँ २१ प्रमुख व्यक्ति कें अकादमीक सदस्य मनोनीत कएल गेल । एहि अकादमीक अध्यक्ष माननीय मुख्य मंत्री श्रीमती शीला दीक्षित रहतीह आ ओ प्रो. अनिल मिश्रा कें अकादमीक उपाध्यक्ष मनोनीत केलनि अछि । प्रो. मिश्रा राजेन्द्र भवन ट्रस्टक मानद सचिव सेहो छथि । उक्त अकादमी मैथिली आ भोजपुरी भाषाक विकास, तत्संबंधी ग्रंथक प्रकाशन, दोसर भाषा सँ मैथिली आ भोजपुरी मे अनुवाद आदि सँ संबंधित काज देखत । एहि शीर्षक केर अंतर्गत एकटा एहन व्याक्तित्व के परिचय अछि जे गुरु भेलाक बाबजूदो
विद्यार्थी लोकनि सामान्यतः प्रमुख मित्रक रुपमे जानल जाइत छथिन्ह दिल्ली
स्थित प्रीत विहार क्षेत्र मे प्रीत पब्लिक स्कूलमे रीटा गोसेन नामक ई
शिक्षिका विद्यार्थी लोकनिमे बड़ड ख्याति प्राप्त छथि । हिनक शिक्षण शैली
बाल मनोविज्ञान, मित्रवत स्नेह आ दंडक बजाय प्रेमपूर्वक बुझाकऽ पढेनाए
पर आधारित अछि । हिनक विद्यार्थी लोकनि स्वयं कहैत छथि जे हमर वर्गशिक्षिका
सभ बच्चाकें एकहि संग लऽकऽ चलबाक ईच्छा राखैत छथि हिनक गुण आ मार्ग दर्शनिक
प्रभाव निश्चित रुप छात्र - छात्रा पर सेहो पड़ैत अछि । एक दिस जतय समाचार
पत्र मे किछु गुरु अपन छात्र-छात्राकें पढ़ाई लेल प्रताड़नाक सहारा लैत
छथि ओतहि एहनो शिक्षिका एकटा उदाहरणस्वरुप छथिन्ह जे गुरु-शिष्य परंपराक
निर्वहन कऽ लोकप्रियताक मुकाम हासिल कऽ रहल छथिन्ह । एकरा अतिरिक्त हिनक
भाषा प्रेम काबिल तारीफ अछि । राष्ट्रीय आ अंतर्राष्ट्रीय भाषाक जानकार
आ जिज्ञासु रीटा गोसेन प्रमुख भारतीय भाषा मैथिलीक प्रति सेहो अनुरक्ति
राखैत छथिन्ह ! एतेक विद्वताक बाबजूदो हिनक कथन अछि जे हम मैथिली पढ़बाक
आ कनैक बुझबाक कोशिश कयलहुँ अछि । नव भाषा सीखबाक हमर बड़ड मोन करैत अछि । एहने दुर्लभ प्रतिभाआ व्यक्तित्वक आगाँ मोन
स्वयं नतमस्तक भऽ जायत अछि । आओर हिनके लेल कहल गेल अछि - जनवरी २००८ |