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मिथिला यात्राक परिचय
मिथिलाक संपूर्ण भूभाग सांस्कृतिक समृद्धतासँ परिपूर्ण अछि । भारतीय सभ्यता संस्कृति केर इतिहास पटलमे मिथिलाक स्थान महत्वपूर्ण अछि । मिथिलाक वैदिक ओ पांडित्य परम्पराक एखनहुँ चर्चा होयत अछि । मिथिलाक शिल्प मूर्त्तिकला, चित्रकला, शास्त्रार्थ सरल आ सहज जीवन शैली अनुकरणीय अछि ।
मिथिला यात्राक उपरोक्त परिप्रेक्ष्यक अंतर्गत चारिटा श्रेणी मे बाँटल जा सकैत अछि -
(१) गाम्रीण यात्रा
(२) धार्मिक यात्रा
(३) ऐतिहासिक यात्रा
(४) शोध यात्रा
(१) ग्रामीण यात्रा
मिथिलाक गाम भारतक कोनो गामसँ फराक अछि । एतुका माटि केर उर्वराशक्ति बाढ़ि प्रभावित क्षेत्रक कारणे अन्य क्षेत्रसँ बेसी अछि । मिथिलाक गाम्रीण शैलीमे सहजता, सरलता, मधुरता आ समरसताक गुण विद्यमान अछि । एहि क्षेत्रक कृषि एखनहुँ पुरान कृषि प्रणाली पर निर्भर अछि । मिथिलाक पान, माछ, मखान आ तालाब बड्ड प्रसिद्ध अछि । डेग- डेग पर मंदिरक शंखनाद , मैथिली बोलीक माधुर्य आ उत्कृष्ट चिंतनशैली मिथिलाक ग्रामीण यात्रासँ भेट सकैत अछि । भारतीय संस्कृति केर बेजोड़ नमूना एहि यात्राक दौरान भेटत ।
(२) धार्मिक यात्रा
मिथिलाक सभ क्षेत्रमे हिंदू धर्माबलंबी लोकनिक अधिकता अछि । पर्यटनक दृष्टिकोणसँ मिथिला, बिहारक अन्य क्षेत्रसँ बेसी समृद्ध अछि मुदा, राजनीतिक वा अन्य कारणे एकर विकास नहि भऽ सकल अछि । मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी प्रखंड अंतर्गत उच्चैठ शक्तिपीठक महिमा इतिहासमे वर्णित अछि । कालिदासकेँ एहि ठाम ज्ञान प्राप्ति भेलनि । मधेपुरा जिलान्तर्गत सिंहेश्वरस्थान, दरभंगा जिलान्तर्गत बाबा कुशेश्वरस्थान, सीतामढ़ी जिलान्तर्गत जानकीस्थान, दरभंगा जिलान्तर्गत विद्यापतिकडीह आ राजकिला स्थित श्यामा मंदिरक महिमा प्रख्यात अछि । एकरा अतिरिक्त कएकटा मंदिर आ डीह अछि जकर वर्णन एकरामे भेटत । सरकारक उपेक्षापूर्ण नीतिसँ एखन धरि एकर विकास नहि भऽ सकल अछि । सरकारके सकारात्मक दृष्टिकोणसँ एहि क्षेत्रक धार्मिक विविधताक स्वरुपके संरक्षण आ संवर्द्धन भेट सकैत अछि मुदा एकरा लेल जनमानसके जागय पड़तनि। जदि कोनो सरकारी वा गैर सरकारी संस्था मिथिला यात्राक वृहद योजना तैयार करय तँ हुनका प्रबल समर्थन आ सफलता भेटत ।
(३) ऐतिहासिक यात्रा
ऐतिहासिक यात्राक दृष्टिकोणसँ मिथिलाक बडड पैध स्थान अछि । जखने सीताक चर्चा होयत तँ ओकर पर्यायवाची श्ब्द मैथिली आ मिथिलाक चर्चा अवस्से होयत । सीताक पिता जनक, जनकपुर राज्यक राजा छलाह । एहिठामक इतिहास एखनहुँ जानकी मंदिर, जनकपुर आ राजनगरक किला, दरभंगा महाराजक किला, दरभंगा स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय आ कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा म्यूजियम आदि देखलासँ प्राप्त भऽ सकैत अछि । मिथिलाक पुस्तकालयमे कतेको रास पोथीमे पुरातन इतिहास सँ संबंधित सामग्री भेट सकैत अछि । दरभंगा स्थित लक्ष्मीश्वर सिंह पब्लिक लाइब्रेरी संस्कृत विश्वविद्यालयक आ ल. ना. मि. वि. वि. केर केन्द्रीय पुस्तकालयमे मिथिलासँ संबंधित कएकटा पोथी प्राप्त भऽ सकैत अछि । दरभंगा स्थित मिथिला रिसर्च इंस्टीच्यूटमे मिथिलाक संस्कृत विद्वानक पांडुलिपि आ पोथी पर्याप्त मात्रामे उपलब्ध अछि ।
(४) शोध यात्रा
शोध करनिहार विद्यार्थी लोकनिक लेल मिथिलामे प्रचुर विषय अछि । भारतीय सभ्यता संस्कृति, प्राचीन मूर्त्तिकला, पांडुलिपि, साहित्य, लिपि (मिथिलाक्षर), चित्रकला (मिथिला पेंटिग्स), राजा- महाराजाक युग, पांडित्य परंपरा, शास्त्रार्थ आ विभिन्न प्रथा पर देशक विभिन्न कोन आ विदेशसँ सेहो शोधार्थी लोकनि अबैत रहैत छथि । दरभंगाक मिथिला वि. वि. मे कएकटा अंगरेज मैथिली आ मिथिला सँ संबंधित विषय पर शोध कऽ रहल छथि । कालिदासक ज्ञान प्राप्ति स्थल उच्चैठ शक्तिपीठ, आ विद्यापतिक डीह सँ संबंधित विषय पर शोध केर व्यापक संभावना अछि ।
सरिसब : सरिसब बछराजा नदीक तट पर बसल एकटा गाम अछि । इ मधुबनी-पुपड़ी मार्ग पर स्थित अछि । इ मधुबनी सँ २२ कि०मी० पूब-दक्षिण अछि । ई गाम मुख्य रूप सँ धार्मिक अनुष्ठानक लेल जानल जाइत अछि । एहि गाम कें विश्वप्रसिद्ध अयाची मिश्र आ हुनक पुत्र शंकरक जन्मस्थली रहबाक गौरव प्राप्त छैक । ई ओएह अयाची मिश्र छलाह जे जिनगी भरि अपन किछु बाड़ी पर बिता देलाह आ केकरो सँ कोनो याचना नहि केलनि । ओ जीवन पर्यन्त शिक्षा देबय मे बिता देलाह । कहल जाइत अछि जे जहन हुनक पुत्र शंकरक जन्म भेल तँ चमैन कें देबाक लेल हुनका लग किछु नहि रहनि आ ओ चमैन कें कहलनि जे शंकरक पहिल कमाई ओकरा देताह । जहन शंकर मात्र ५ बरषक अवस्था मे अपन विद्वता सँ महाराज दरभंगा सँ स्वर्ण मुद्रा प्राप्त केलनि तँ अपन प्रतिज्ञानुसार ओ स्वर्ण मुद्रा अयाची मिश्र चमैन के दऽ देलखिन । चमैनो आखिर छल अयाची मिश्रक गामक । ओहो ओहि मुद्रा सँ पोखरि खुनेलक आ आइयो ओ पोखरि चमैनियाँ पोखरिक नाम सँ पूरा मिथिला मे प्रसिद्ध अछि ।
सरिसब मे मुख्यत: माँ काली, चैती नवरात्रा, शिवराति, कृष्णाष्टमी, दाहा, अश्विनी नवरात्रा, गंगा दश्हरा आदि धूमधाम सँ मनाओल जाइत अछि । एतय लगभग सभ धर्मक देवताक पूजा कएल जाइत अछि । नवरात्रा मे एतयक बछराजा नदीक जल माँ उच्चैठ महारानी कें चढ़ेनाइ बहूत शुभ मानल जाइत अछि । सभ साल एकर आयोजन विद्याधर झा द्वारा कएल जाइत अछि । एहि मे हर साल हजारों लोक भाग लैत छथि । सरिसबक एकटा विशेषता इ अछि जे एहिठाम हर देवी-देवताक मंदिर अछि । इ मंदिर सभ मानव निर्माणक बेहतरीन नमूना अछि । सरिसब मे छोटू चौक पर बनल उगना महादेव आ माँ कालीक मंदिर बहूत नीक अछि । एतय काली मंदिरक संग-संग ब्रह्म स्थान आ संगहि धर्मशाला सेहो अछि । एतय कर्महे टोलक वैलही चौक पर बनल माँ दुर्गाक मंदिर बहूत भव्य अछि । गंगा दशहरा आ शिवराति मे एतय दूर-दूर सँ लोक अबैत अछि आ बाबा उगना महादेव आ लगे मे स्थित हरिहरनाथ कें बछराजा नदीक जल चढ़बैत अछि ।
ठाढ़ी : ठाढ़ी मिथिलाक प्राचीन गाम मे गानल जाइत अछि । इ प्राचीन समये सँ संस्कृत शिक्षाक केंद्र रहल अछि । कहल जाइत अछि जे इ गाम हरदम हर विपत्ति मे ठाढ़ रहल अछि आ तें एकर नाम ठाढ़ी पड़ि गेल । एहिठाम आठम-नवम सदी मे वाचस्पति मिश्र भेलाह जे अपन विद्वताक लेल विख्यात छलाह । वाचस्पतिक समय मे ठाढ़ी संस्कृत शिक्षाक केन्द्र छल । कहल जाइत अछि जे हुनका लग नहि केवल स्थानीय छात्र शिक्षाक लेल अबैत छलाह वरन असम, बंगाल आदि सँ सेहो छात्र अबैत छलाह । हुनकहि शिष्य उदयनाचार्य मिथिले नहि अपितु बंगाल सँ सेहो बौद्ध धर्मक उच्छेद केलनि । जनश्रुति इहो अछि जे स्वयं देवताक गुरू वृहस्पतिक पुत्र हिनका सँ शिक्षा ग्रहण करबाक निमित्त आयल छलाह । कहल जाइत अछि जे एक बेर वाचस्पति मिश्र कोनो पितृ कर्म करैत रहथि आ वृहस्पतिक पुत्र उक्त कर्म करबैत रहथीन आ कि तखनहि कोनो बचिया लाल कपड़ा पहिरि के ओतय आबि गेल । ताहि पर ओतय उपस्थित पितर लभ भागय लगलाह । संजोग सँ ओहि पितर सभ मध्य एकटा नांगर पितर छलखिन, जे धरफराइत खसि पड़लाह । ताहि पर वृहस्पतिक पुत्र कें हँसी लागि गेलनि । वाचस्पति मिश्र एहि संबंध मे प्रश्न केलनि आ तखन गुरूक हठ पर वृहस्पतिक पुत्र इ मानि लेलनि जे ओ स्वर्ग लोक सँ विद्याध्ययनक निमित्त एहिठाम आयल छथि । कहल जाइत अछि जे वाचस्पति दंपति कें संतान नहि छलनि आ ताहि कारण सँ हुनक पत्नी दुखी रहैत छ्लीह । एहि पर वाचस्पति ‘भामती’ नामक ग्रन्थ लिखलथि । भामती हुनक पत्नी छ्लीह आ एहि ग्रंथक कारणें वाचस्पति आ भामतीक नाम अमर भऽ गेलनि । एहि गामक परमेश्वरी मंदिर पूरा इलाका मे प्रसिद्ध अछि आ संगहि एहिठाम प्राचीन सूर्य मंदिरक अवशेष सेहो अछि । इ गाम मिथिला मे बौद्ध धर्मक पताकाक समक्ष हिन्दू दर्शन कें जिया के रखबाक लेल सेहो प्रसिद्ध अछि ।
गाम यात्रा - महिषी
महिषी सहरसा जिला (बिहार) क एकटा प्रसिद्ध गाम अछि । ई सहरसा रेलवे स्टेशन सँ ७ मीलक दूरी पर अछि । ई गाम कोशी नदीक बाढ़ि क्षेत्र मे अबैत अछि आ कोशीक उग्रताक कारणें एहिठाम बरसात मे पहुँचब दुष्कर होइत अछि । महिषी गाम बड़ पुरान गाम अछि आ पूरा देश मे मंडन मिश्र (आठवी सदीक महान दार्शनिक) क गामक रुप मे प्रख्यात अछि ।
मंडन मिश्र आ शंकराचार्य
ई कहल जाइत अछि जे शंकराचार्य दक्षिण सँ अयलाह आ मंडन मिश्र आ हुनक पत्नी भारती सँ शास्त्रार्थ कयलनि । शंकराचार्य दिग्विजय (धर्म विजय) क क्रम मे एतय अयलथि आ सर्वप्रथम इनार पर पानि भरैत एकटा पनिभरनी सँ मंडन मिश्रक घरक ठेकान पुछलथि । ओ पनिभरनी संस्कृत मे कहलक जे अहाँ कनेक आगाँ जाऊ आ जाहि द्वारि पर देखबैक जे सुग्गा सभ अपना मे संस्कृत मे चर्चा कऽ रहल अछि, से मंडन मिश्रक घर छियनि । शंकराचार्य पनिभरनीक निदेशानुसार बढ़लाह आ मंडन मिश्रक घर पर पहुँचलाह । मंडन मिश्र आ शंकराचार्य मे शास्त्रार्थ भेल आ मंडन मिश्र पराजित भेलाह । भारती बजलीह जे ओ एखन सिर्फ आधा अंग के पराजित केलनि अछि आ आब हमरा सँ शास्त्रार्थ करथि । भारती शंकराचार्य सँ कामशास्त्र सँ संबंधित प्रश्न कयलनि, जेकर उत्तर ओ नहि दऽ सकलाह । एकर बाद शंकराचार्य अपन शारीर के छोड़ि दोसर शरीर मे प्रवेश कयलनि आ कामशात्रक ज्ञान प्राप्त कऽ कऽ वापस भेलाह आ एकर बाद भारती कें शास्त्रार्थ मे पराजित केलनि । महिषी गाम मे एखनो एकटा डीह अछि, जेकरा संबंध मे ओहि गामक लोक कहैत छथि जे शास्त्रार्थ एतहि भेल छल । एहि गाम मे उग्रतारा देवीक मंदिर अछि । कहल जाइत अछि जे मंडन मिश्र एहि देवीक भक्त छलाह ।
उग्रतारा मंदिर संपूर्ण देशक प्रसिद्ध मंदिर अछि आ एकर संबंध तंत्र विद्या सँ सेहो अछि । महिषी सँ एक-दू मीलक दूरी पर कन्दाहा गाम मे सूर्य मंदिर सेहो अछि ।