You need to upgrade your Flash Player to at
least version 7 to view this video content.
धार्मिक यात्रा
अष्टयोगिनी मंदिर : इ हाल मे बनल सहरसाक बेहतरीन मंदिर मे सँ एक अछि । एकरा मत्स्यगंधा मंदिरक नाम सँ सेहो जानल जाइत अछि । इ सहरसा जिला मुख्यालयक नजदीक अछि । बिहार सरकार एकर निर्माण सहरसा मे पर्यटनक बढावा देबाक लेल कयलक अछि । इ मंदिर धार्मिक आ पर्यटन दुनू नजरि सँ नीक अछि । इ मंदिर माँ कालीक अछि । एकरा संगहि एहि मे चौसठ आन देवीक प्रतिमा सेहो लगाओल गेल अछि, जाहि कारण सँ एकरा चौसठ योगिनी मंदिरक नाम सँ सेहो जानल जाइत अछि । आइ ई बिहार सरकार द्वरा बनाओल गेल नीक पर्यटन भवनक रूप मे जानल जाइत अछि । बिहार सरकार के चाही जे एहन आर मंदिर बनाबय ताकि बिहार मे पर्यटन के बढावा भेटैक ।
जनकपुर : इ भारत देशक बिहार सीमा सँ सटल अछि आ नेपाल मे स्थित अछि । आमजनक अनुसार विदेह जनकक राजधानी एतहि छल । जनक परंपराक अनेको जनक मे एक्कैसम जनक सीरध्वज जनक सब सँ बेसी प्रसिद्ध भेलाह । ओ अयोध्या राजा दशरथक समकालीन छलाह । रामक पत्नी सीता सीरध्वज जनकक पुत्री छ्लीह । रामायण, महाभारत आदि प्राचीन ग्रंथ मे राजा जनकक राजधानी जनकपुर बताओल गेल अछि । राजा जनकक प्राचीन महल जनकपुर सँ सात कोस दूर छल । जनकपुरक प्रसिद्धिक कारण माता सीताक अयोध्याक राजा दशरथ सँ वियाह अछि । हिन्दू धर्म मे जनकपुरक बहुत महत्व अछि । रामनवमी आ विवाहपंचमीक समय मे आइयो लाखों लोक एतय अबैत अछि । आइयो एतय माता सीताक पावन मंदिर अछि आ रामजी द्वारा तोड़ल गेल धनुष सेहो अछि । एतय पहुँचबाक लेल भारतक दरभंगा सँ बस आ रेल अछि । नई दिल्ली सँ विमान सुविधा सेहो अछि ।
उच्चैठ : उच्चैठ मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी थाना मे अछि । एतय देवी दुर्गाक एकटा पुरान आ पैघ मंदिर अछि । ई स्थान कमतौल रेलवे स्टेशन सँ २४ कि०मी० दक्षिण अछि आ दरभंगा सँ बस सँ सीधा जूडल अछि । एहि दुर्गा मंदिरक अपन खास ऐतिहासिक महत्व अछि । एकटा पौराणिक कथाक हिसाब सँ एतय कालीदास रहैत छलाह । कालीदास पहिने महामूर्ख छलाह ।
ओहि समय सदानंद नामक एकटा प्रसिद्ध राजा छलाह । हुनक बेटी विद्योतमा सुंदर आ गुणवती छ्लीह । विद्योतमा वियाहक लेल आयल अनेको राजा सँ वियाह करबा सँ मना दऽ देलनि आ प्रण केलनि जे ओ हुनके सँ वियाह करतीह जे हुनका सँ बेसी गुणवान हुअए । एहि सँ अपमानित भेल राजाक पंडित लोदनि बदला लेबाक लेल सोचलथि आ एकटा महामूर्खक खोज मे लागि गेलाह । एक दिन हुनका लोकनिक नजरि कालीदास पर पड़ल, जे एकटा गाछक डारि पर बैसल छलाह आ ओकरहि काटि रहल छलाह । विद्वान लभ सोचलाह जे एहि सँ पैघ मूर्ख कतय भेटत । ओ कालीदास कें राजा सदानंदक दरबार मे लऽ गेलाह आ विद्योत्मा सँ हुनक वियाहक प्रस्ताव केलनि । पंडित लोकनि इहो कहलाह जे एखन ई मौन व्रत धाराण केने छथि आ तें इशारा मे गप्प करैत छथि ।
विद्योत्मा दरवार मे उपस्थित भेलीह आ मौन रूप सँ प्रश्न पूछैत एकटा
आँगुर उठेलीह, जेकर अर्थ भेल - ईश्वर एक छथि । कालीदास सोचलाह जे
ई हमर एकटा आँखि फोड़य चाहैत अछि तँ हम हिनक दुनू फोड़ि देब आ तें ओ अपन
दूटा आँगुर
उठा देलनि । विद्योत्मा बुझलीह जे ई ईश्वरक दू रूप बतबैत छथि आ
तें दूटा आँगुर उठेलनि अछि । पुन: दोसर प्रश्न मे विद्योत्मा अपन पाँचो
आँगुर उठेलनि
जेकर अर्थ भेल _ मूल तत्व ५ अछि । कालीदास सोचलाह जे ई हमरा थापड़
मारत तँ हम एकरा मुक्का मारब आ ओ पाँचों आँगुर बान्हि मुक्का देखेलनि
। विद्योत्मा
सोचलीह जे हिनक आशय ५ तत्व सँ मीलि कें बनल शरीर सँ अछि आ विद्योत्मा
हारि मानि लेलनि । एवं प्रकारे कालीदास आ विद्योत्माक वियाह भेल । परंतु
बाद
मे वास्तविक स्थितिक ज्ञान भेला पर विद्योत्मा कालीदास कें अपमानित
कऽ घर सँ निकालि देलनि ।
तत्पश्चात कालीदास विद्याध्ययनक लेल उच्चैठ पहुँचलाह आ एहिठाम रहि
सभ शास्त्रक ज्ञाता भऽ गेलाह । आइयो लोक एहिठामक माँटि अपन घर लऽ
जाईत अछि आ विश्वास करैत अछि जे दुर्गाक कृपा सँ हुनको घर मे कालीदास
सदृश विद्वान
हेताह ।
वाणगंगा : वाणगंगा मधुबनी जिलाक मधबापुर थानाक नजदीक अछि । ई स्थान मधुबनी-सीतामढ़ी मुख्य मार्ग पर माधोपुर गामक लग मे अछि । एतय महादेवक एकटा पुरान आ प्रसिद्ध मंदिर अछि । कहल जाइत अछि जे महाभारत काल मे जहन अर्जुन एतय अयलाह तँ पानि पीबाक लेल अपन तीर सँ एतय एकटा पोखरिक निर्माण केलनि जे आई वाणगंगा नाम सँ जानल जाइत अछि । बरसातक समय मे पोखरि पैघ भऽ जाइएत अछि आ एतयक नजारा देखबा जोग होईत अछि ।
उग्रतारा मंदिर, महिषी : ई मंदिर सहरसा जिला मुख्यालय सँ चौदह कि०मी० पश्चिम अछि । ई मंदिर अत्यंत पुरान अछि । अनेक शास्त्र मे सेहो एकर वर्णन भेटैत अछि । एतय देवीक भक्त समय-समय पर अबैत रहैत छथि । माँ ताराक मंदिर सँ सटले माँ सरस्वतीक मंदिर सेहो अछि , जाहि मे माताजीक भव्य मूर्ति लगाओल गेल अछि । एतय पहुँचबाक लेल सहरसा जिला मुख्यालय सँ बस सेवा उपलब्ध अछि । एहि स्थानक रख-रखाव सेहो नीक अछि । व्स्तुत: ई मंदिर मिथिलाक भव्य आ पवित्र स्थान मे सँ एक अछि ।
कपिलेश्वर स्थान : ई स्थान मधुबनी जिला मे अछि आ दरभंगा सँ २४ कि०मी० उत्तर आ मधुबनी सँ १२ कि०मी० पश्चिम अछि । ई मंदिर दरभंगा-जयनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ैत अछि । मानल जाइत अछि जे कपिल मुनि द्वारा शिवलिंग स्थापनाक कारण एकर नाम कपिलेश्वर पड़ल । एतय हरदम भक्त लोकनि महादेवक दर्शनक लेल अबैत रहैत छथि । साओन आ शिवराति मे तँ एतय लाखों भक्त जल चढेबाक लेल अबैत छथि ।
किछु लोकक कहब छनि जे कपिल मुनिक निवास स्थान मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी प्रमंडलक विशनपुर गाम मे छल । किंतु विष्णु पुराणक अनुसार हुनक निवास स्थान पाताल लोक मे छल, जतए इंद्र राजा सगरक अश्वमेघ घोड़ा कें चोरा कें बान्हि देने छलाह आ कपिल मुनिक शाप सँ सगरक पुत्र आ साठि हजार सैनिक कें नष्ट कऽ देलनि । एहि घटना सँ मुनि कपिल आ सगरक समकालीनता प्रमाणित होइत अछि । इतिहासकारक कहब छनि जे राजा सगर मनुक चालिसम पीढ़ी मे छलाह ।
विभिन्न पुराणक अनुसार भागिरथी गंगा सागर नामक तीर्थ कोलकाता मे स्थित अछि, जतयक कथाक अनुसार राजा सगरक सैनिक जहन कपिल मुनिक कुटिया मे अश्व्मेघक घोड़ा कें बान्हल देखलथि तँ चोर बूझि हुनक अपमान केलक । एहि पर कपिल मुनि तमसा कें सगरक सैनिक कें नाश कऽ देलनि । एकर बाद कपिल मुनि कपिलेश्वर पहुँचलाह आ शिवलिंगक स्थापना कऽ तपस्या करय लगलाह ।
हरिहर स्थान : ई स्थान मिथिला मे निर्मित आधुनिक भव्य मंदिर मे सँ एकटा अछि । ई मधुबनी जिला मे बेनीपट्टी लग अछि । एतय जेबाक लेल दरभ्म्गा आ मधुबनी सँ बस सेवा उप्लब्ध अछि । एतय महादेवक भव्य आ पैघ मंदिर अछि । प्रत्येक वर्ष शिवरातिक अवसर पर लाखों भक्त लोकनि एतय अबैत छथि ।
अहिल्या स्थान : अहिल्या स्थान दरभंगा जिलाक कमतौल थानाक अहियारी गाम मे स्थित अछि । एहि स्थान धरि पहुँचबाक लेल सब सँ नीक साधन रेल अछि । एतय जेबाक लेल दरभंगा सँ रेल सेवा उपलब्ध अछि । पुराणक अनुसार गौतम मुनिक निवास स्थान एतहि छल । एकटा पौराणिक कथाक अनुसार गौतम मुनिक पत्नी अहिल्या छलीह । एकबेर देवराज इंद्र गौतम मुनिक आश्रम मे अयलाह । ओ ओतय अहिल्या के देखलथि आ हुनकर दिव्य रूप पर मोहित भऽ गेलाह आ हुनका संग अभिगमन करबाक मोन बनेलनि ।
किछु दिनक बाद आधा राति मे इंद्र मुर्गाक आवाज दऽ कऽ गौतम के जगा देलनि । गौतम स्नान करबाक लेल चलि गेलथि । ओकर बाद इंद्र गौतम मुनिक रूप धऽ कऽ अहिल्याक घर मे प्रवेश कयलथि । ओमहर गौतम मुनि कें मध्य रातिक आभास भेलनि आ ओ वापस भऽ गेलाह ।
घर आबि ओ इंद्र के अपन पत्नीक संग देखलथि तँ तमसा के शाप दऽ देलनि आ अहिल्या पाथरक भऽ गेलीह । अहिल्या द्वारा माफी मंगला पर गौतम मुनि कहलथि जे जहन भगवान विष्णु त्रेता युग मे धरती पर श्रीरामक रूप में अवतार लेताह तँ मिथिला जेबाक समय अपन चरण कमल सँ अहाँक उद्धार करताह । त्रेता युग मे जहन श्रीराम मिथिला अयलाह तँ ओ अहिल्या कें उद्धार केलनि । वाल्मिकी रामायण मे सेहो गौतम मुनिक निवास स्थान मिथिला कें मानल गेल अछि ।
गान्डिश्वर : ई स्थान मधुबनी जिला मे पड़ैत अछि आ मधुबनी-सीतमढ़ी मुख्य मार्ग पर अछि । एतय महादेवक एकटा पुरान मंदिर अछि, जे जमीन सँ करीब ६ फीट गहींर अछि । कहल जाइत अछि जे पांडव अपन गुप्त वासक अवधि मे राजा विराटक राजनगर मे निवास करैत छलाह, तहन अर्जुन अपन विराट धनुष कें एतहि नुका के रखने छलाह आ एतय एकटा शिवलिंगक स्थापना कयलनि आ तें एहि स्थानक नाम गान्डिश्वर पड़ि गेल ।ओकरहि लग मे अर्जुन तीरयुक्त अपन तरकस रखलनि जेकर नाम आगू चलि के वानेश्वर पड़ल । इ जगह जोगियारा स्टेशनक नजदीक अछि ।