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  ऐतिहासिक यात्रा ऐतिहासिक यात्रा: भागलपुर मिथिलाक महत्वपूर्ण बौद्धस्थल-महिषी
  सौराठ सभा    

मिथिलाक महत्वपूर्ण बौद्धस्थल-महिषी

डॉ. शिव कुमार मिश्र

सर्वविदित अछि जे मिथिला आदिकालेसँ वैदिक मतक केन्द्रबिन्दु रहल जयत दूर-दूरसँ ऋषि-मुनि आ विद्वानलोकनि आबि कऽ अपन ज्ञानक अर्जन आ प्रदर्शन करैत छलाह । मिथिलाक राजा जनक स्वयं बड़ पैघ दार्शनिक आ विद्वान-दार्शनिक लोकनिक आश्रय देनिहार छलाह । हुनक दार्शनिक क्रिया-कलापक चर्चासँ उपनिषद, ब्राह्मण ग्रंथ, वैदिक साहित्य, महाकाव्य आदि भरल-पड़ल अछि । बौद्धकालेसँ एतय बोद्धमतक सेहो निर्बाध गतियें प्रचार-प्रसार भेल । एहि क्षेत्रक आन-आन वर्गक संग-संग ब्राह्मण लोकनि सेहो खुशी-खुशी एहि धर्मकँ स्वीकार कयलनि जकर प्रभाव बौद्ध साहित्य सभमे कतिपय स्थान पर भेटैछ । मुदा बौद्धग्रंथक मिथिला संबंधी आख्यानकेँ इतिहासकार आ पुरातत्वविद लोकनि सभ दिन उपेक्षाक दृष्टिसँ देखैत रहलाह । कहियो ओकर महत्वकेँ जगजियार नहि होमय देलनि । परिणामस्वरुप मिथिलाक बौद्धस्थलक उन्‍नति नहि भेल, ने एहि पर अनुसंधान भेल आ ने मान्यते देल गेल जाहिसँ मिथिलाक बौद्ध स्थल सभ पर्यटन स्थलक रुपमे ख्याति अर्जित नहि कऽ सकल ।

मिथिलांचलक कतिपय बौद्धस्थलक एखन धरि अभिज्ञान भऽ चुकल अछि जाहिमे सहरसा जिलाक प्रमुख ऐतिहासिक गाम महिषीक एकटा अपूर्व स्थान अछि । ई गाम बनगांवसँ ७ कि. मी. २५’५०’५०" उत्तरी अक्षांश आ ८६’३१’१" पूर्वी देशान्तरक मध्य अवस्थित अछि जे सहरसा सँ १५ कि. मी. पश्‍चिममे स्थित अछि । ओना प्रख्यात दार्शनिक महामहोपाध्याय मण्डन मिश्र एवम्‌ आदिशंकराचार्यक शास्त्रार्थसँ सम्बद्ध होयबाक कारणे एहि गामक एकटा विशेष महत्ता अछि मुदा बौद्ध संदर्भक कारणे सेहो एकर महत्व कम नहि । एतय एकटा प्रसिद्ध शक्‍तिपीठ उग्रतारा स्थान अछि ।

एहि सम्बन्धमे कहल जाइत अछि जे प्रायः १२०० वर्ष पूर्व कोनो विशिष्ट ऋषि द्वारा एकर स्थापना कयल गेल । उग्रतारा केँ बौद्ध मतावलंबीक देवी मानल जाइत अछि । अतः संभव अछि जे पालवंशी राजा लोकनिक समयमे कोनो बौद्ध भक्‍त एकर स्थापना कयने होयताह । ई तथ्य इहो स्पष्ट करैत अछि जे ई क्षेत्र बौद्धधर्म आ ओकर अनुयायी राजाक अधिकारमे रहल होयत । उग्रतारा मन्दिरमे बलिप्रथा प्रचलित अछि जाहिसँ स्पष्ट बुझबामे अबैछ जे ई एकटा एहन स्थान छल जतय बौद्ध आ सनातन दुनु मतक समन्वय स्थापित छल । एहि क्रममे बनगांवक ताम्रपत्रकेँ देखल जा सकैत अछि जाहिमे बौद्धधर्मक वृद्धि आ पालवंशी बौद्ध राजा लोकनिक यशक हेतु ई क्षेत्र शांडिल्य गोत्रक ब्राह्मणकेँ अनुदान स्वरुप देल गेल छल । एहि विषय पर विशेष चर्चा डॉ. डी. सी. सरकार महोदय अपन बनगांव फ्लैट ऑफ विग्रहपाल-॥। नामक आलेखमे कयने छथि ।

महिषीक उग्रतारा देवीकँ चीनसँ तिब्बत आ नेपाल बाटे एतय आनल गेल छल । तांत्रिक लोकनिक बड़ पैघ आ पवित्र देवी उग्रताराकेँ मानल जाइत अछि । मैथिल विद्वान ज्योतिरीश्‍वर ठाकुर अपन अमर कृति वर्णत्‍नाकरमे श्मशान वर्णनक क्रममे उग्रताराकेँ चौसठि योगिनी कहलनि अछि । महिषीक एहि देवीक मूर्तिकेँ खदिरबानि तारा सेहो कहल जाइत अछि । मूल उग्रताराक मूर्ति अत्यंत भयानक होइत अछि जिनका गरदनिमे मुण्डमाल रहैत छनि आ शवक ऊपर ओ ठाढ़ि रहैत छथि । विनयतोष भट्‍टाचार्यक कहब छानि जे देवीक ललाटपर एकटा आओर छोट मूर्ति होयबाक चाही । महिषीक एहि देवीक कातमे एक जात आ नील सरस्वतीक दूटा मूर्ति छनि । एवं प्रकाएं एहि देवीक खदिरबनि तारा कहल गेल छनि । खदिरबनि ताराकेँश्यामतारा सेहो कहल जाइत छनि, कारण ओकर रंग हरियर होइत अछि । ध्यानीबुद्ध अमोघसिद्धिक एकटा निर्गमकेँ खदिरबनि तारा कहल गेल अछि । एहि तरहक ताराक मूर्ति बिहारमे कतिपय स्थान पर भेटल अछि ।

महिषी गामसँ प्राप्त बौद्ध पुरावशेष एहि बातक प्रबल गवाही दऽ रहल अछि जे एतय बौद्धमतक प्राबल्य छल आ एहिठामक निवासी लोकनि बुद्धक मूर्तिक पूजा करैत छलाह । महिषीसँ बुद्धक दूटा प्रतिमा भेटल अछि जे पटना संग्रहालयमे राखल अछि । एकटा प्रतिमा बारहम शताब्दीक अछि जकर आकार २००*१६० मिमी अछि आ दोसर प्रतिमा दसम शताब्दीक अछि जकर आकार ८५०*४९० मिमी अछि । एहि मूर्ति सभमे बुद्धकेँ भूमिस्पर्श मुद्रामे देखाओल गेल अछि । एहि प्रकारक मूर्ति सभ मिथिलांचलक कतिपय आनो स्थान सभसँ प्राप्त भेल अछि जेना कि मनपौर आ विदेश्‍वर स्थानक मूर्ति । महिषीक उग्रतारा मंदिरक परिसरमे कतेको आओर मंदिर सभ अछि । एकटा मंदिरमे बहुत रास देवी-देवताक मूर्ति सभ राखल अछि जाहि पर पूजा कयल जाइत अछि । ई मूर्ति सभ पालवंशी राजा लोकनिक समयक बूझि पड़ैछ । एहिमे कतिपय खण्डित मूर्ति सभमे एकटा बुद्धक गरदनिसँ ऊपर वला भाग पूर्ण सुरक्षित अछि मुदा गरदनिसँ नीचा छाती सहित आन अंग खण्डित अछि । ई मूर्ति कारी पाथरक अछि आ हिन्दू देवता मानि पूजित भऽ रहल अछि । एहि मूर्तिकेँ संरक्षण कऽ संग्रहालयमे राखल जयबाक आवश्यकता अछि ।

साहित्यिक आ पुरातात्विक साक्ष्य सभसँ बूझि पड़ैछ जे पूर्व-मध्यकालीन सनातन आ बौद्धमतक मध्य अद्‍भुत समन्वय स्थापित भऽ गेल छल । एक जतय साहित्य सभक दशावतारक सूचीमे बुद्धकेँ स्थान भेटि गेल छलनि तँ दोसर दिस बुद्ध आ आन हिन्दू देवतालोनिक मूर्ति सबहक एक संग पूजा करबाक प्रमाण भेटैत अछि । मैथिल विद्वान ज्योतिरीश्‍वरक वर्णरत्‍नाकरक दशावतार सूचीमे बुद्धक चर्चा भेटैत अछि तँ देवी भागवत पुराणमे सेहो बुद्धकेँ स्थान भेटल । मिथिलांचलक कतिपय स्थान सभसँ बुद्ध आ आन देवी-देवता लोकनिक एक संग मूर्तिसभ भेटल अछि । मधुबनी जिलाक बिदेश्‍वर स्थानमे प्रसिद्ध-शिवमंदिर अछि जतय बुद्धक मूर्तिक संग-संग कतिपय आन देवता लोकनिक मूर्ति भेटल अछि । एहि स्थानसँ किछु दूर पर जमथरि गाममे शिवलिंग संग-संग बुद्धक मूर्ति भेटल अछि । बेगूसराय जिलाक जयमंगलागढ़ मे प्रसिद्ध शक्‍तिपीठ अछि जतय बौद्ध पुरावशेष सेहो भेटैत अछि । तहिना सहरसा जिलाक बरातपुरमे चंडी स्थान बड्‍ड प्रसिद्ध शक्‍तिपीठ अछि जतय बुधेशक प्रतिमा भेटैछ । बुधेशकेँ एहिठाम बुधायस्वामी कहल जाइत छनि । परातपुरमे पालवंशीय राजा द्वारा बनबाओल गेल बौद्ध स्तुपक भग्नावशेष विद्यमान अछि । मधुबनी जिलाक अंधराठाढ़ीसँ सेहो बुद्ध आ आन देवता लोकनिक प्रतिमा संग-संग भेटल अछि । एहि प्रमाण सभ सँ स्पष्ट होइछ जे दुनू धर्ममे कोनो प्रकारक भेद नहि छल आ हिन्दू लोकनि बुद्धकेँ विष्णुक अवतार मानि पूजैत छलाह ।

महिषी गामक ब्राह्मणलोकनि बुद्धक अनुगामी भऽ गेल छलाह जकर सबसँ अपूर्व प्रमाण हुनका लोकनिक ‘मूल’ आ मूलग्राममे विराजमान अछि । जेना कि हमरा लोकनि जनैत छी जे मिथिलामे कर्णाटवंशीय राजा हरिसिहं देवक समयमे मैथिल ब्राह्मण आ कर्णकायस्थक वर्णीकरण कयल गेल छल आ ‘पंजी व्यवस्था’ केँ सुदृढ़ कयल गेल छल । बादमे पंजी प्रथाकेँ बड़ ख्याति भेटलैक । तत्कालीन मिथिलाक ब्राह्मण आ कर्णकायस्थ लोकनिक निवासवला जतेक प्रमुख गाम छल तकर नाम पर मूलग्राम तय कयल गेल । ताहि क्रममे महिषीकेँ सेहो मूल ग्रामक सूचीमे राखल गेल । महिषी मूलग्रामक ब्राह्मण आ कर्ण कायस्थ मिथिलाक प्रायः सभ भागमे भेटैत छथि । महिषी मूलग्रामक ब्राह्मण लोकनि ‘बुधवारे’ मूलक सेहो भेटैत छथि जिनका बुधवारे महिषी कहल जाइत छनि । हमरा बुझि पड़ैछ जे ओहन ब्राह्मण लोकनिकेँ बुधवारे कहल गेल जे लोकनि बुद्धक अनुगामी छलाह । एहि तरहें महिषी मूलक ब्राह्मणकेँ बुधवारे मूलक हएब हुनका लोकनिकेँ बौद्धमतावलंबी होयबाक उत्कृष्ट प्रमाण अछि । एवं प्रकारें विविध साक्ष्य सभसँ प्रमाणित होइत अछि जे महिषीमे बौद्धमतक प्राबल्य छल आ ई गाम मिथिलाक एकटा प्रमुख बौद्धस्थल छल । एहि गामक इतिहास आ पुरातत्व पर विस्तृत अन्वेषणक आवश्यकता अछि जाहिसँ एकर महत्व जगजियार भऽ सकत । बौद्धस्थलक रुपमे मान्यता भेलोपरांते ई पर्यटक लोकनिकेँ अपना दिस आकृष्ट कऽ सकत ।

बापू नगर, उत्तरी मंदिरी,

पटना-१

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