Mithilavihar All Login Index

You need to upgrade your Flash Player to at
least version 7 to view this video content.

पग-पग    पोखरि   माछ    मखान,   
सरस    बोल    मुस्की    मुख   पान  ।
विद्या-वैभव        शान्ति        प्रतीक,  
सरितांचल  श्री  क्षेत्र  मिथिला  थिक॥
मिथिलाधाम
 » आराध्य-देव » आराध्य-देव
Mithilavihar All Login Index

आराध्यदेव

मिथिलामे प्रमुख रुपसँ भगवती (काली आ दुर्गा), शिव (भोलेशंकर), हनुमानजी आ सीता-राम आदिक पूजा होयत अछि । एहि ठाम दुर्गापूजा, काली पूजा, सरस्वती पूजा, कृष्णाष्मीमे कृष्णपूजा , विश्‍वकर्मा पूजा, चित्रगुप्त पूजा आ शनिवार केँ शनिदेवक पूजा होयत अछि । ओना मिथिलाक महिला लोकनि पुरुषक तुलनामे बेसी भक्‍तिभाववला मानल जाइत अछि ताहि लेल ओ सप्ताहक सभ दिन कोनो ने कोनो व्रत आ त्योहार मनबैत रहैत छथि । एकर अतिरिक्‍त सभ घरमे अपन पैतृक देवता (गोसाउनि) फराक होयत छथि । सभ पर्व त्योहारक दौरान देवताक पूजा निष्ठापूर्वक कयल जायत अछि । मिथिलाक गामीण क्षेत्रमे भगवतीक सात पिण्डक स्वरुपकेँ सेहो धूमधाम सँ पूजा कयल जायत अछि । मिथिलाक वर्ग विशेषमे (अनुसूचित समाज ) राजा सलहेस, ब्रह्मबाबा, बाल्मीकि, आल्हा रुदलक पूजा अर्चना गीतनादक संग प्रफुल्लित मोनसँ कयल जायत अछि ।

दीपावली मे गणेश, लक्ष्मी आ छठि पावनि मे सूर्यक पूजा, चौठचन्द मे चन्द्रमाक पूजा हरितालिका पूजा, जिमूतवाहन पूजा, जितिया, वटसावित्री पूजा, दिनकरक, आशा माइक, तीज, बिषहरा पूजा, अनंत पूजा, घड़ी पावनिक विशेष महत्ता अछि । प्राचीन युगसँ मिथिलामे वृक्ष पूजाक विशेष महत्व अछि । उदाहरणस्वरुपे वृहस्पतिवारके केलाक गाछक पूजा, शनिवारकॆँ पीपलक गाछक, वटसावित्री पूजाक अवसर पर बड़ गाछक पूजा कयल जायत अछि । सभ पूजाक लेल दूभि (हरियर घास) आ तुलसीपात (तुलसीदल) अवश्‍य देल जायत अछि । भोलेनाथ के मनेबाक लेल बेलपत्र या दुर्गाजीके न्योता देबाक लेल बेल्नोती-बेलतोड़ीक प्रथा अछि ।

मिथिलामे कोनो शुभ कार्यक प्रारंभमे सत्यनारायण पूजा आ गणेश-लक्ष्मीक पूजा कयल जायत अछि । मिथिलाक नारी समाज गौड़ी (भोलेनाथक पत्‍नी पार्वती) आ हुनक बसहा (बड़द) केर पूजा मोन सँ करैत छथि । दुर्गा पूजाक अवसर पर कुमारि कन्याक भोजन आ पूजन के सेहो प्रथा अछि ।

दुर्गा पूजा आ कालीपूजाक अवसर पर किछु लोकनि तांत्रिक आराधना अपन अभीष्ट सिद्धिक लेल सेहो करैत छथि । मिथिलामे राम सँ बेसी हनुमान आ सीताक आराधना द्रष्टव्य अछि । मिथिलाक वृद्ध लोकनि भोलेनाथक नचारी आ पराती गबैत छथि । आराध्यदेव पर जल आ दूध देबाक प्रथा अछि । मिथिलामे पूजाक पूर्णता विधि-विधान सँ कयलाक उपरान्त मंत्र जाप गीतनाद आ आरतीक अतिरिक्‍त शंखनाद सँ होयत अछि । प्रत्येक पूर्णिमा आ ग्रहणक उपरांत गंगास्नान वा नदी स्नानक परंपरा अछि । नेना सभऽक यज्ञोपवीत, मुंडन वा विवाहक दौरान सेहो आराध्यदेवक पूजा अर्चना अभीष्ट होयत अछि । संक्षेपमे कहल जाय तँ एहि ठामक संपूर्ण विधि विधान वैदिक मान्यतासँ युक्‍त अछि । सीताक कृपासँ मिथिला कृतकृत्य भऽ गेल । मिथिलाक अधिष्ठात्री महादेवी भगवती चामुण्डा छथि ।

मूलाधार चक्र भेदन चण्ड वध थिक । मिथिलाक मध्यमे लक्ष्मणा प्रवाहमती छथि तथा एहि लक्ष्मणा तट निवासिनी भगवती चामुण्डा नील सरस्वती रुपा छथि जनिक आराधना प्रमुखत: निशीथर्म, संध्या द्वारा कयल जायत अछि । मिथिलाक आध्यात्मिक साधना आ आराध्यदेव पर शोध सेहो भऽ रहल अछि । एतय शैव आ शाक्‍त परंपरामे फराक मान्यता अछि । निरामिष व्यक्‍ति कंठी धारण करैत छथि आ बेसी लोकनि लेल लहसुन - प्याज वर्जित अछि ।

This space is Booking for Advertisment
 Mithilavihar.com for copywrite

© 2007
मिथिलाविहार.कॉम.