परिवहन व्यवस्था

परिवहन के साधन किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति तथा विकास के प्रतीक हैं। यह आर्थिक क्रियाओं को गति प्रदान करता है। परिवहन व्यवस्था के समुचित विकास से औद्योगीकरण, कृषि समृद्धि तथा मानव-जीवन की उत्कृष्टा निर्भर करती है।

बिहार की परिवहन प्रणाली प्रारम्भ से ही राज्य की स्थालाकृति एवं नदी प्रणाली से प्रभावित रही है। नौका गम्य नदियों के तटबन्धो पर परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराती है। राज्य की परिवहन व्यवस्था गंगा नदी पर नियन्त्रण विशेष रुप से परिलक्षित होती है। गंगा नदी के उत्तर तथा दक्षिणी मैदानी भागों में रेलमार्ग तथा सड़को की परिवहन व्यवस्था बाढ़ तथा धरातलीय प्रवाह की दृष्टी को बनाये रखने के लिए तटबन्धो का निर्माण किया गया।

बिहार राज्य की परिवहन व्यवस्था में उत्तर भारत के अनेक राज्यों से सड़क मार्ग से जुड़ी है। शेरशाह ने पेशावर तक सड़क मार्ग का निर्माण किया गया। बिहार में परिवहन व्यवस्था में सड़क और रेलमार्ग महत्वपूर्ण है, लेकिन जल परिवहन का सीमित विकास हुआ है।

विकास की आधरभूत संरचना में परिवहन व्यवस्था एक महत्वपूर्ण और क्रान्तिक अंग है। बिहार की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। बिहार में यातायात के मुख्यतः चार साधन हैं-

१.सड़क परिवहन, २.रेल परिवहन, ३.वायु परिवहन, ४.जल परिवहन।

सड़क परिवहन

प्राचीनकाल से ही बिहार उत्तर भारत के अन्य भागों से सड़क मार्ग से जुड़ा है। प्राचीन साम्राज्यों की प्रशासनिक एवं आर्थिक व्यवस्था स्थल मार्गों की सुलभ व्यवस्था करती थी। सम्राट अशोक ने वैभवशाली मगध साम्राज्य को राजधानी तथा राजगौर और पाटलिपुत्र के मध्य सुन्दर राज्य मार्ग का निर्माण कराया।

मध्यकाल में मुगल शासकों तथा शेरशाह ने परिवहन योग्य सड़क का निर्माण किया। भारत का प्रख्यात राष्ट्रीय मार्ग ग्राण्ड ट्रक रोड बिहार से होकर गुजरता है। जिसका निर्माण शेरशाह ने १५४२ई. में किया था। यह पेशावर से कोलकता तक जाती थी।

१९४७ई. में बिहार में कुल सड़कों की लम्बाई १,३१५ किमी. थी। अभी बिहार में सड़को की लम्बाई ६७,११६ किलोमीटर है। सड़क मार्ग को चार श्रेणियों में बाँटा जा सकता है-

१. राष्ट्रीय मार्ग, २. प्रान्तीय मार्ग, ३. स्थानीय राजमार्ग, ४. सार्वजनिक निर्मित पक्‍की एवं कच्‍ची सड़क।

१. राष्ट्रीय मार्ग-यह प्राथमिक प्रणाली सड़क व्यवस्था है। इसकी जिम्मेदारी केन्द्रीय सरकार पर है। राज्य में ४,७१७ किमी. लम्बे सड़क मार्ग का निर्माण किया गया है। इसके अलावा २६,०९२ लम्बी एकहरी सड़को का दोहरीकरण होने जा रहा है। देश में राष्ट्रीय राजमार्गो की लम्बाई मात्र २% है। बिहार में सड़क यातायात का सबसे प्रमुख साधन है। सड़को से सम्बन्धित २००१ के प्राप्त आँकड़े के अनुसार निम्न हैं-

१. राष्ट्रीय राजमार्ग-२,४६१.७३ किमी.

२. प्रान्तीय राजमार्ग-१,०९५१.७१ किमी.

३. स्थानीय राजमार्ग की लम्बाई-१५,००० किमी.

४. कच्चे एवं पक्‍के सार्वजनिक निर्मित सड़क की लम्बाई-१३,४१२.९ किमी.

* राज्य में औसत प्रत्येक दिन गाड़ियाँ २०० से २५० कुमी. चल पाती हैं।

* राष्ट्रीय औसत के अनुसार जनसंख्या के अनुपात में राज्य में १,९२,७७४ किमी. सड़को की आवश्‍यकता है।

* भौगोलिक क्षेत्रफल के अनुसार राज्य को राष्ट्रीय औसत की बराबरी करने के लिए १५,४७३ किमी. सड़कों की अतिरिक्‍त आवश्‍यकता है।

* दसवीं पंचवर्षीय योजना में ७००.८१करोड़ रुपये राज्य में आवंटित किये गये हैं जिसमें ३,२०० किमी.लम्बी सड़क का निर्माण किया जाना है।

*प्रधानमन्त्री ग्रामीण सड़क योजना के अन्तर्गत बिहार को वर्ष २००७ तक ३४,२०० करोड़ रुपये देने का प्रावधान है जिससे बिहार के बचे ६२% गाँवों को पक्‍की सड़को से जुड़ने है। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग की लम्बाई-२,१०० किमी. है।

बिहार के राष्ट्रीय मार्ग निम्न हैं-

(1) राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-२-यह राष्ट्रीय राजमार्ग बिहार में ३९२ किमी. गुजरती है। दिल्ली तथा कोलकाता एवं कानपुर से जोड़ता है।

(2) राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-६-बिहार में लम्बाई २२ किमी.

(3)राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-२३-२५० किमी. लम्बाई

(4)।राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-२८-२५९ किमी. लम्बाई

(5)राष्ट्रीय राजमार्ग-३०-२३० किमी. लम्बाई

(6)राष्ट्रीय राजमार्ग-३१-४३७ किमी. लम्बाई

प्रस्तावित १४ नये राजमार्ग में ५ बिहार से होकर जाते हैं।

(1)राष्ट्रीय राजमार्ग-८१-१०० किमी. लम्बाई

(2) राष्ट्रीय राजमार्ग-८२-१३० किमी. लम्बाई (गया, राजगीर, बिहार शरीफ, मोकामा)

(3)राष्ट्रीय राजमार्ग-८३-१३० किमी. लम्बाई (पटना, पुनपुन, गया, बोधगया, डोभी)

(4)राष्ट्रीय राज्यमार्ग-८४-६० किमी. लम्बाई(आरा, बक्सर, वाया भोजपुर)

(5)राष्ट्रीय राजमार्ग-८५-८५ किमी. लम्बाई (छपरा से गोपालगंज वाया सीवान)

बिहार में सड़को की कुल लम्बाई ८८,३५२ हैं। तैयार सड़कें ३२.९९८, सड़क की सघनता ५०८.१२, राष्ट्रीय राजमार्ग-२.२१८ किमी., राजमार्ग ४,०९२ किमी. जिलों सड़कों की लम्बाई ६०,९५७ किमी., जिला परिषद्‌ सड़क मार्ग की लम्बाई १३,९४७ किमी. तथा ४७,०१० किमी. है।

* जापान की सहायता से बिहार में बुद्ध सर्किट का निर्माण किया जा रहा है।

२. प्रान्तीय राजमार्ग-इसमें जिला मुख्यालयों एवं प्रदेश की राजधानी को जोड़ने वाले अनेक मार्ग आते हैं। भौतिक अवरोध के कारण इस मार्ग का कम विकास हुआ है। बिहार के मैदानी भाग में सड़के वर्षा के समय जल प्लावित हो जाती हैं।

३. स्थानीय सड़कें- स्थानीय सड़के जिला मुख्यालय को छोटे-छोटे नगरों, कस्बों को आपस में जोड़ती हैं ये कच्ची एवं पक्‍की दोनों होती हैं। यह ईंट के सोलिंग से बनता है। यह वर्षा से टूट-फूट हो जाती है।

रेल परिवहन

बिहार में रेल परिवहन का शुभारम्भ १८६०-६२ ई. में हुआ। ईस्ट इण्डिया रेलवे कम्पनी ने गंगा के किनारे से कोलकाता तक जाने वाली रेल के प्रमुख मार्ग का निर्माण किया गया। रेल परिवहन हावड़ा को मुगलसराय से जोड़ने के क्रम में साहेबगंज, भागलपुर, पटना, आरा, बक्‍सर के मध्य हुआ था। इसके बाद किऊल से झाझा और आसनमोल के बीच रेल लाइन बिछायी गयी थी। किऊल-गया शाखा को मुगलसराय तक बढ़ा दिया गया। बिहार में रेलमार्ग की सघनता, गंगा के मैदानी भाग की धरातलीय एकरुपता, सघन जनसंख्या तथा रेलमार्ग निर्माण में सुविधा देती है। वर्तमान में हाजीपुर को मध्य-पूर्वी रेलवे का मुख्यालय बनाया गया है।

बिहार में पूर्वोत्तर रेलमार्ग (एन.ई.आर) पूर्वी रेलमार्ग तथा पूर्वोत्तर सीमा रेलमार्ग क्रमशः उत्तरी-मध्य और उत्तरी बिहार के क्षेत्रों से जुड़ी है। फतुहाँ (पटना) में मालगाड़ी टर्मिनल का निर्माण किया जा रहा है। पटना-गया रेलवे लाइन का दोहरीकरण हो रहा है।

१३ नवम्बर, २००१ से बिहार में प्रथम शताब्दी एक्सप्रेस को पटना-हावड़ा के बीच शुरु की गई।

पूर्वोत्तर रेलवे मार्ग- इसका प्रमुख क्षेत्र बिहार के उत्तरी भाग में है। इसे कमला रेलमार्ग भी कहा जाता है। इसमें नरकटियागंज, खसौल, वनमुखी, पूर्णिया, मानसी, कटिहार, समस्तीपुर, सोनपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा,दरभंगा आदि शहर एवं कस्बों को जोड़ती है। एक मार्ग सिलीगुड़ी तक जाती है।

२००० ई. से दिल्ली से दरभंगा से सत्याग्रह एक्सप्रेस चल रही है। इसको ब्रांड लाइनें छोटी लाइनों से भी जोड़ने की व्यवस्था है।

पूर्वी रेलमार्ग- दक्षिणी बिहार में पूर्वी रेलमार्ग के ग्रैण्ड कार्ड एवं लूप लाइन बहुत विकसित हैं। यह दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग के मुख्य मार्ग के अन्तर्गत आता है। ये सभी ब्राण्ड गेज पर है। इसमें भागलपुर, पटना, बरौनी आदि शहर जुड़े हैं।

जल मार्ग

१९वीं शदी के अन्त तक आन्तरिक व्यापार का प्रमुख साधन जलमार्ग ही था। गंगा और इसकी सहायक नदियाँ नौकागम्य है। घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक तथा कोसी आदि नदियाँ नौकागम्य हैं गंगा से बूढ़ी गंडक नदी में मुजफ्फरपुर तक और कोसी नदी में हनुमान नगर तक नौका परिवहन की सुविधा है। दक्षिण बिहार की नदीयों में पुनपुन, सोन नदियों में नौकागम्य सुविधा उपलब्ध है। पश्‍चिम सोन नहर से निकलने वाली आरा नहर की कुल लम्बाई तक ८३ किमी. नाव और स्टीमर चलते हैं।

राष्ट्रीय जल मार्ग संख्या-१-जो इलाहाबाद से हल्दिया तक विस्तृत है। यह बिहार से ही गुजरती है।

बिहार राज्य में जल मार्ग में गंगा नदी प्रमुख है बिहार राज्य में ६०० किमी. तक आन्तरिक जल परिवहन मार्ग है। यहाँ तीन प्रमुख जल मार्ग हैं जो निम्न हैं-

१.बराबरी घाट-महादेवपुर घाट (भागलपुर जाने के लिए)

२.मोकामा बरौनी स्टीमर सेवा।

३.सोन बैराज स्टीमर सेवा।

केन्द्रीय सरकार द्वारा आन्तरिक जल मार्ग प्राधिकारण की स्थापना की गयी है जो आन्तरिक मार्ग के महत्व को समझकर बढ़ावा देगा। कम खर्चीला और समय की बचत करने वाले इस परिवहन संसाधन का भरपूर लाभ उठाने की कोशिश करेगा। बिहार एक भू-आवेशित राज्य है। इसे समृद्धि मार्ग की सुविधा उपलब्ध नहीं है। बिहार के जल मार्ग के अन्तर्गत नदियों एवं नहरों को सम्मिलित किया गया है। गंगा नदी में साल भर ६३१ किमी. तक नौकागम्य रहता है।

बिहार में परिवहन संसाधनो की बहुत ही जटिल समस्याएँ रही हैं। उत्तरी बिहार के मैदानी भाग में नदियों का जाल बिछा हुआ है। यहाँ भौतिक समस्याएँ, आर्थिक एवं राजनीतिक समस्या के कारण विकास नहीं हो पा रहा है।

वायु मार्ग

बिहार में वायु मार्ग का प्रमुख विकास नहीं के बराबर है।काठमाण्डू के निकट और कोलकता-दिल्ली वायु मार्ग पर स्थित होने के कारण पटना राज्य का प्रमुख हवाई अड्डा है। यहाँ से प्रतिदिन हवाई उड़ान मुम्बई को उड़ती हैं। और दिल्ली एवं पटना होती हुए रांची तक जाती हैं। वायु परिवहन का बिहार राज्य में सर्वप्रथम विकास १९६० ई. में हुआ था। जय प्रकाश नारायण हवाई अड्डा पटना ही राज्य का एकमात्र अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। पटना से काठमाण्डू, कोलकाता एवं दिल्ली के लिए वायुसेवा उपलब्ध हैं। बिहार में कुल सात हवाई अड्डे हैं-पटना, गया, मुजफ्फर, जोगवानी, रक्सौल, भागलपुर एवं राजगीर हैं।

*पूर्णिमा में वायुसेना के हवाई अड्डे है। पटना में उड्डयन और अन्तर्राष्ट्रीय क्लब है।

*१२ नवम्बर, २००२ को महात्मा बुद्ध की धर्मस्थली गया और श्रीलंका के बीच अन्तर्राष्ट्रीय उड़ान को प्रारम्भ किया गया।

राजगीर में अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा-विदेशी पर्यटको के लिए बनाया जायेगा।