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पग-पग    पोखरि   माछ    मखान,   
सरस    बोल    मुस्की    मुख   पान  ।
विद्या-वैभव        शान्ति        प्रतीक,  
सरितांचल  श्री  क्षेत्र  मिथिला  थिक॥
फेम-मिथिला
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महावीर सिंह

मिथिलाक अमर स्वतंत्रता सेनानी : महावीर सिंह स्वर्गीय महावीर सिंह केर जन्म ९ जून, १९०७ ई० मे मधुबनी जिलाक (तत्कालीन दड़िभंगा) फुलपरास थानान्तर्गत विष्णुपुर गाम मे भेल छलन्हि । हिनक पिता स्व० महादेव सिंह किसान छलाह । महावीर सिंह के परबाबा हृदय नारायण सिंह १८५७ के संग्राम मे वीर कुंवर सिंह केर निकटतम आ विश्वस्त सहयोगी छ्लाह तऽ हिनक पिता किसानक दमन केर खिलाफ दड़िभंगा महाराज सँ बगावत कऽ किसान मे स्वाभिमान जगौने छ्लाह । पारिवारिक पृष्ठभूमि आ आनुवांशिक गुण हिनक व्यक्तित्व केर विकास आ जीवन-दर्शन मे सदैव मार्ग दर्शन करैत रहलन्हि ।

मधेपुर उच्च विद्यालय सँ ई मैट्रिक पास कएने छलाह कि १९२२ ई० मे हिनका महात्मा गांधी के भाषण सुनबाक सौभाग्य भेटलैन्हि आ मात्र १३ वर्षक अवस्था मे ओ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन मे शामिल भऽ गेलाह । १९३० मे ओ जागेश्वर स्थान, हुलास पट्टी मे सत्याग्रह कैम्प लगा सत्याग्रह आंदोलन मे सेहो शामिल भेलाह । २१ मई, १९३२ के अंग्रेज सरकार हिनका ’सनरी ट्रायल" के अंतर्गत पकड़ि पटना कैम्प जेल पठा देलकन्हि । जेल मे राजेंद्र बाबू, अनुग्रह नारायण सिंह श्रीकृष्ण बाबू आदि नेता सँ हिनक परिचय भेलन्हि । १९३६ मे ओ अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटीक सदस्य बनाओल गेलाह आ १९६५ तक एकर सदस्य रहलाह । १९३९ तक फुलपरास कांग्रेस कमिटीक मंत्री रहलाह । १९३९ मे ओ निर्विरोध फुलपरास थाना कमेटीक अध्यक्ष चुनल गेलाह आ १९६० तक एहि पद पर बनल रहलाह । १९४० मे विलायती कपड़ाक विरोध आ मद्य निषेधक व्यक्तिगत सत्याग्रहक चलते पुन: गिरफ्तार क’ लेल गेलाह, मुदा दू महिना बाद छोड़ि देल गेलाह । १९४२ केर "भारत छोड़ो आंदोलन मे हिनक सक्रियता के देखैत हिनका पकड़बा लेल ’टॉमी फौज’ पठाओल गेल । किन्तु ई भूमिगत भऽ गेलाह । टॉमी फौज भाड़ी उपद्रव मचौलक । हिनक घर मे आगि लगा देल गेल आ हिनक सभ संपत्ति जब्त कऽ लेल गेल । किंतु हुनक सक्रियता पर कोनो प्रभाव नहि पड़लन्हि । अंतत: हुनका पर पांच हजार टका ईनाम सेहो घोषित कएय गेल किन्तु ओ पुलिसक गिरफ्त मे नहि अयलाह । एहि बीच ओ नेपाल चलि गेलाह । जखन हनुमान नगर के जैल पर हमला कय कऽ लोहिया आ जयप्रकाश के सूरज नारायण सिंह के द्वारा मुक्त कराओल गेल तऽ ओ गुप्तरूपेण ओहिठाम छ्लाह । गांधीवादी होयबाक कारणे ओ एहि मुहिम मे प्रत्यक्षत: भाग नहि लेलाह परन्तु अन्य रूप सँ सहायक छ्लथिन्ह । गुप्तवासक दरम्यान ओ किछु दिन सहरसा मे एकटा सम्पन्न किसानक ओहिठाम ’राम सेवक सिंह’ के नाम सँ मैनेजर सेहो रहलाह । ओ स्वतंत्रता आंदोलनक अलावा समाजसेवी आ वैज्ञानिक दृष्टि वला व्यक्ति सेहो छ्लाह । कोसी नदी के बाढ़िक विभीषिका आ बाद मे पसरैत महामारी के समय मे ओ पीड़ितक सेवा मे अपना के पूर्णत: अर्पित कऽ दैत छ्लाह । तें एहन विभीषिका केर समय हुनका सहायक आ सेवाक पर्याय मानल जाइत छलन्हि । ओ कोमी रिलीफ कमेटीक अध्यक्ष सेहो रहला । स्वशासन, न्यायिक कार्य आ विकास हेतु सरकारक भरोसे रहबाक बजाय ओ सहयोग आ सामाजिक सरोकार मे स्वयं आगू अएबाक पक्षधर छ्लाह । छोट-मोट झगड़ा मे न्यायालय जयबाक जगह ओ आपसी मेल के बढ़ावा देलाह । हुनका स्थानीय स्तर पर अघोषित सामाजिक न्यायाधीशक सम्मान सेहो प्राप्त छलन्हि । उम्रक संग हुनक जीवटता, साहस आ उत्साह मे कोनो कमी नहि आएल । हुनका जीवन सँ जूड़ल बहुतो ऐहन पक्ष अछि जे अविस्मरणीय अछि । उम्रक छठम दशक मे हिनका मोतियाबिन्दक शिकायत शुरू भऽ गेल रहैन्हि । मुदा एहि सँ हिनक साहस, जीवटता आ उत्साह मे कोनो अंतर नहि पड़ल । ताहू समय मे एक बेर जखन एकटा बच्ची दलानक ईनार मे खसि पड़ल तऽ उम्र आ दृष्टि दोषक शिकायत बिसरि ओ तुरन्त ईनार मे कूदि गेल छ्लाह आ ओहि बच्चिया केर जीवन रक्षा कएने रहथि । एहिना एक बेर जखन ओ अपन सासुर गेल रहथि तऽ पड़ोसक एकटा फूसिक घर मे आगि लागि गेल रहै । हिनक जीवटता छलन्हि जे ओ तुरत चार पर चढ़ि फूस के पहिने दू भाग मे बाँटि आगि पसरब सँ रोकबा मे वैज्ञानिक दृष्टिकोणक परिचय देने रहथि आ आगि पर सहजहिं काबू पाओल जा सकल ।

राष्ट्र आ समाज सेवा के परम लक्ष्य माननिहार महावीर बाबू कें कहियो कोनो लोभ वा पदक आकर्षण सम्मोहित नहि क’ सकल । स्वतंत्रताक रजत जयन्तीक अवसर पर हुनक त्याग, समर्पण आ राष्ट्रक प्रति सेवा के देखैत १५ अगस्त, १९७२ के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व० इंदिरा गांधी हिनका महान स्वतंत्रता सेनानी घोषित करैत, दिल्लीक लालकिला पर ताम्रपत्र सँ विभूषित कएलथिन्ह ।

८५ वर्षक अवस्था मे १४ नवम्बर, १९९२ के मिथिलाक ई महान सपूत अपन संघर्ष, त्याग, बलिदान आ सेवा के धरोहरि रूप मे छोड़ि एहि नश्वर जगत सँ विदा भऽ गेलाह । ओ नहि रहलाह किन्तु हुनक आदर्श हमरा बीच एखनहुँ अछि आ विष्णुपुर स्थित ’महावीर सिंह मेमोरियल ट्रस्ट’ हुनक सपना आ आदर्श केर अनवरत अलख जगा रहल अछि । सरिपहुँ मिथिला भूमि एहि सपूतक त्याग आ बलिदान सँ गौरवान्वित अछि ।

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