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पग-पग    पोखरि   माछ    मखान,   
सरस    बोल    मुस्की    मुख   पान  ।
विद्या-वैभव        शान्ति        प्रतीक,  
सरितांचल  श्री  क्षेत्र  मिथिला  थिक॥
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भारतीय वांग्मय में मिथिलाक स्थान अप्रतिम अछि. जा धारि वेद ओ रामायण अहि देश मे सुनल ओ सुनाओल जायत मिथिलाक स्मरण कयल जायत, हजारो साल धरि.. राज्य कहि ली -- एकर स्वतंत्र अस्तित्व रहल, आधुनिक भारत में ई पहिचान मलिन होइत गेल. गणराज्यक स्थापना बाद मिथिलाक स्वतंत्र पतिचिति के बेस तिरोहित होमय पद्लेक. ई क्षेत्र राज्य कही वा देश कहि ली -- एकर स्वतंत्र अस्तित्व रहल. आधुनिक भारत में ई पहिचान मलिन होईत गेल, गणराज्य स्थापना बाद मिथिलाक स्वतंत्र परिचिति के बेस तिरोहित होमय पड्लेक. ई क्षेत्र बिहार राज्य्क एकता अंग मात्र रहि गेल, कखनो-कखने एकरा मोन पाडि लेल जाईत छेस. समयक संग मिथिला बनि गेल मिथिलांचल ... सोझ भाषा में कही त नुआक आंचर मात्र रहि गेल, ई कोना भेल .. कखन भय गेल .. ककरो पलखति नहि सोचबाक. अख्यास कयला पर एकर भान होईत अछि. साजिश कहि वा मिथिलाकवासीक कोढिपन..नतिजा येह जे मिथिलाक पहिचान संकट में. इलालक लोक में अपन विरासतक प्रति अनास्था चहुं दिस देखल जा सकेत अछि. अहि कुहेस कें हटयबाक लेल मिथिला विहार डाँट काँम सोझा आयल अछि.
मिथिला विहार डाँट काँम एक गोट वेब पोर्टल थिक. जाहि मे मिथिलाक जनजीवनक कतिपय परत केम खोलबाक यत्न अछि , संगहि देश-विदेश मे पसरल मेथिलिक कें एहि सं अवगत करायब अकर उद्देश्य . अदो काल कं चलि अबेत जीवन दर्शनक बखान, मिथिला संस्क्रति पर पड्ल गर्दा कें पोछि ओकरा झलकायब आ दुनियांक सोझां जगजियार करबाक प्रयास अछि.
उद्देश्य..महिमाक चर्चे टा नहि.. एकरा संग आजुक संदर्भ पर सेहो नजरि रहत. गाम-घर सं लय शहर धरि .. चुल्हि-चोका सं लय विभिन्न गतिविधि मे मेथिलिक सत्प्रयास के सामवेश कएल जायत. मिथिला विहार डाँट काँम कें एखन धरि मिथिला धाम, फ़ेम मिथिला, मिथिला यात्रा, मिथिला माँल ओ मिथिला पत्रिका नामक पांच गोट लिंक में बांटल गेल अछि, एहु सभक सब-लिंकेज सेहो अछि.
ओना तं रोजी-रोटिक लेल पुरनो समय में गाम-घर छोडि मोरंग, धरान जयबाक चर्च मेथिली साहित्य मे अभरेत अछि. तथापि आई-काल्हि विपतिक मारल लोलक पलायनक रफ़्तार दुखी करेत अछि, पेट्क जोगार्क बीच अपन संस्क्रति सं कट्वा पर ओनायब हुनका लोकनि मे देखल जा सकेत अछि. एहि ओनी-पथारी कें शब्द देब मिथिला विहार डाँट काँम केर उद्देश्य अछि.
छहोछित होईत विरासत कें जोगायब, प्राचीन पांडुलिपिक संरक्षण, हेरायल, उपेक्षित कला तत्वक संग्रह ओ संबधित कलाकार सं दुनियाक परिचय करायब हमर प्राथमिकता थोक, नेयार बहुत किछु अछि... मिथिलाक संबंध में तत्क्षण जे जानकारी चाही..... सब किछु भेट्त, समग्र इनसाईक्लोपेडिया कही वा जे कहि ली... मिथिलाक संबंध मे शोधक ईच्छा हुएय... एहि वेव पोर्टल के सेवाक मोका दी. हमर प्रयास मे किछु अखरय त सहर्ष बताबी. अपनेक सहयोग अपेक्षित अछि.
नोर पोछ्य हम नहि आयल छी...--हमर दुखक नहि ओर-- कें बिसरु...सभ मिलि समवेत स्वरक प्लेट्फार्म बनी सएह अभीष्ट...

- संजय मिश्र

 



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